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वट सावित्री व्रत में ध्यान रखने योग्य 7 बातें, हर महिला को जानना जरूरी

वट सावित्री व्रत में ध्यान रखने योग्य 7 बातें, हर महिला को जानना जरूरी

वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत पावन व्रत माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और सावित्री के तप और प्रेम की कथा सुनती हैं। आइए जानते हैं इस विशेष पर्व से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें-पूजा विधि, तैयारी, तिथि और परंपराएं।

वट सावित्री व्रत 2025: तिथि और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 26 मई 2025 को दोपहर 12:11 बजे आरंभ होगी और 27 मई को प्रातः 8:31 बजे समाप्त होगी। चूंकि अमावस्या तिथि का प्रभाव दिन में रहेगा, इसलिए वट सावित्री व्रत 26 मई को ही रखा जाएगा। इस दिन वट वृक्ष (बरगद) की पूजा कर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। व्रत करने वाली महिलाओं को सूर्योदय से पहले स्नान करके संकल्प लेना चाहिए और शुभ मुहूर्त में पूजन करना चाहिए।

व्रत की तैयारी कब और कैसे करें?

व्रत से एक दिन पहले ही सभी पूजन सामग्री इकट्ठा कर लेनी चाहिए। साफ सुथरे वस्त्र, हल्दी-कुमकुम, रोली, मौली, सात प्रकार के अनाज, जल कलश, मिठाई, फल, पांच लोटे जल, वट वृक्ष के लिए धागा (कच्चा सूत), और सावित्री-सत्यवान की कथा की पुस्तक आवश्यक होती है। साथ ही पूजा थाली भी सजा लें और ब्राह्मण या पंडित से विधि पूछ लें।

व्रत का धार्मिक महत्व क्या है?

वट सावित्री व्रत एक अद्भुत उदाहरण है पत्नी के प्रेम और समर्पण का। सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान को पुनः जीवन दिलाकर पतिव्रता धर्म की मिसाल कायम की थी। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करके अपने पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन से करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

व्रत रखने की विधि क्या है?

इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं। दिनभर बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास रखती हैं। दोपहर के समय वट वृक्ष के नीचे जाकर विधिवत पूजन करती हैं। पेड़ को धागा लपेटते हुए सात परिक्रमा करती हैं और सावित्री की कथा सुनती हैं। पूजा के बाद दान-दक्षिणा देकर व्रत का समापन करती हैं।

वट वृक्ष का पूजन क्यों होता है?

वट वृक्ष को त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु और महेश-का वास स्थल माना जाता है। यह पेड़ जीवन, प्राण और पुनर्जन्म का प्रतीक है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाने की प्रार्थना करती हैं। पेड़ को पवित्र धागे से लपेटते हुए परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।

व्रत करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

इस दिन संयमित और सात्विक जीवनशैली अपनाएं। व्रत का संकल्प लेते समय सच्चे मन से प्रार्थना करें। अगर स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत संभव न हो, तो फलाहार कर सकते हैं। ध्यान रखें कि पूजा के समय स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा में किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें। कथा ध्यान से सुनें और दूसरों को भी प्रेरित करें।

व्रत के बाद क्या करना चाहिए?

व्रत समाप्त होने के बाद ब्राह्मण को भोजन करवाना या दक्षिणा देना शुभ माना जाता है। घर में सभी को व्रत की कथा का सार बताएं और प्रसाद बांटें। पूजा में उपयोग हुए धागों को वट वृक्ष के पास छोड़ना चाहिए। अगले दिन प्रातः काल में व्रत का पारण करें और भगवान से सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करें।

यह भी पढ़ें:पूजा घर में राम दरबार क्यों रखें? जानिए आध्यात्मिक लाभ

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