अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की विशेष पूजा होती है। इस दिन सोना-चांदी खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदे गए आभूषण पूरे साल समृद्धि का प्रतीक बनते हैं और घर में लक्ष्मी का वास होता है। यदि कोई व्यक्ति सोना या चांदी नहीं खरीद सकता तो उसे मिट्टी का घड़ा, पीतल या तांबे के बर्तन, या लक्ष्मी जी की मूर्ति खरीदनी चाहिए।
अक्षय तृतीया को हिन्दू धर्म में एक अत्यंत शुभ तिथि माना गया है। यह पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है और इस बार 29 अप्रैल की शाम 5 बजकर 31 मिनट शुरू होगी और तिथि का समापन 30 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट होगा। उदयातिथि के अनुसार, अक्षय तृतीया 30 अप्रैल, बुधवार को ही मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन जो भी पुण्य कार्य, दान या खरीदारी की जाती है, उसका अक्षय (नित्य बना रहने वाला) फल मिलता है।
कौड़ियों की खरीदारी भी इस दिन अत्यंत फलदायक मानी जाती है। 11 कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर मां लक्ष्मी को अर्पित करें और बाद में उसे तिजोरी या पूजाघर में रखें। इससे साल भर आर्थिक सुख-समृद्धि बनी रहती है।
क्या न खरीदें अक्षय तृतीया पर?
इस दिन एल्युमिनियम, स्टील, प्लास्टिक की वस्तुएं, कांटे वाले पौधे, काले कपड़े, और किसी भी प्रकार का ऋण या उधार देना-लेना वर्जित माना गया है। इससे जीवन में नकारात्मक ऊर्जा और धन की हानि हो सकती है।
