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Handling Falling Rupee : आर्थिक संकट से निपटने का ब्रह्मास्त्र, सरकार के इस फैसले का आप पर क्या होगा असर?

Handling Falling Rupee

Falling Rupee : ईरान युद्ध के चलते वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है, जिसका सीधा और प्रतिकूल असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। कुछ सप्ताह पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति को स्थिरता देने के उद्देश्य से नागरिकों से विदेशी मुद्रा बचाने की कई भावुक अपीलें की थीं। हालांकि, इन अपीलों का बाजार पर कोई बहुत बड़ा सकारात्मक प्रभाव नहीं देखा गया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी रहा। इस गंभीर स्थिति को भांपते हुए और रुपये की सेहत में सुधार करने के लिए केंद्र सरकार ने देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह को तेजी से बढ़ाने की दिशा में एक बेहद बड़ा और नीतिगत कदम उठाने का फैसला किया है।

केंद्र सरकार का ऐतिहासिक टैक्स रिलीफ

आधिकारिक सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, मोदी सरकार ने भारतीय वित्तीय बाजार में विदेशी फंड को आकर्षित करने के लिए सरकारी बॉन्ड (Government Bonds) में निवेश पर लगने वाले कैपिटल गेन टैक्स को पूरी तरह से माफ करने का एक बड़ा निर्णय लिया है। सरकार के इस बड़े कदम के बाद, अब भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत और व्यक्तिगत निवेशकों को अपने कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ) पर कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। इस क्रांतिकारी फैसले को धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने आयकर अधिनियम (Income Tax Act) में आवश्यक संशोधन करने हेतु एक विशेष अध्यादेश (Ordinance) को भी अपनी मंजूरी दे दी है। यह नया नियम राष्ट्रपति के आधिकारिक हस्ताक्षर और मंजूरी के बाद तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू हो जाएगा।

उठाए जा सकते हैं कई कड़े कदम

केंद्र सरकार को पूरी उम्मीद है कि टैक्स माफी के इस ऐतिहासिक फैसले से वैश्विक बाजारों से भारतीय वित्तीय बाजार में विदेशी निवेश की रफ्तार बहुत तेज होगी। हालांकि, बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहने वाली है। सूत्रों की मानें तो देश में विदेशी मुद्रा भंडार का एक मजबूत संतुलन बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को हर स्तर पर आकर्षित करने के लिए मोदी सरकार आने वाले दिनों में कुछ और भी महत्वपूर्ण तथा कड़े आर्थिक फैसले ले सकती है। जानकारी के अनुसार, सरकार वर्तमान में सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज से होने वाली नियमित कमाई पर भी टैक्स में बड़ी राहत देने या उसे पूरी तरह से टैक्स-फ्री करने के विकल्प पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है।

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों पर लगने वाले टैक्स का मौजूदा गणित

अगर वर्तमान टैक्स व्यवस्था की बात करें, तो विदेशी निवेशकों को भारतीय डेट सिक्योरिटीज (Debt Securities) और शेयर बाजार में लिस्टेड इक्विटी पर कई तरह के टैक्स देने होते हैं। वर्तमान में, 12 महीने से अधिक समय तक होल्ड किए गए निवेश पर विदेशी निवेशकों को 12.5 प्रतिशत की दर से लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) का भुगतान करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, सरकारी बॉन्ड के माध्यम से अर्जित किए जाने वाले ब्याज पर भी विदेशी निवेशकों को 20 प्रतिशत की भारी-भरकम दर से विदहोल्डिंग टैक्स देना होता है। सरकार इन्हीं करों के बोझ को कम करके विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को अधिक आकर्षक और मुनाफे वाला बनाना चाहती है।

ईरान युद्ध के आर्थिक दबाव 

इस पूरे नीतिगत बदलाव के पीछे मोदी सरकार का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी की तरलता को बढ़ाना है, ताकि ईरान युद्ध और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण देश पर बने अभूतपूर्व आर्थिक दबाव को कम किया जा सके। हाल ही में जारी हुई एक वित्तीय रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने इस साल भारतीय शेयर बाजार से लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसा बाहर निकाला है। बड़े पैमाने पर हुई इस बिकवाली ने भारतीय रुपये पर भारी दबाव बनाया है और यही वजह है कि विदेशी निवेश में गिरावट के मामले में इस साल को हाल के इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण और खराब दौर के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का यह नया अध्यादेश इसी भारी आउटफ्लो को रोकने की एक मजबूत कोशिश है।

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