TMC Split : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इस बदलते सियासी घटनाक्रम के बीच नवादा से विधायक हुमायूं कबीर अचानक चर्चा के मुख्य केंद्र बन गए हैं। उन्होंने हाल ही में एक ऐसा कदम उठाया है जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में सनसनी मचा दी है। हुमायूं कबीर ने सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी को विधानसभा उपचुनाव लड़ने का खुला न्योता दे दिया है। कबीर का दावा है कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री स्वयं इच्छा जताएं, तो वह उन्हें रेजिनगर विधानसभा क्षेत्र से भारी मतों से जिताकर विधानसभा भेजने की पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वह ममता बनर्जी की जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव जमीनी मदद करेंगे।
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ टीएमसी सांसदों की संभावित बगावत का दावा
हुमायूं कबीर केवल ममता बनर्जी को सीट ऑफर करने तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने पार्टी के आंतरिक ढांचे को लेकर भी एक बेहद सनसनीखेज दावा किया है। कबीर के अनुसार, टीएमसी के कम से कम 20 मौजूदा सांसद इस समय अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ बगावत करने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो राजनीतिक उथल-पुथल हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर देखने को मिली थी, वही दृश्य बहुत जल्द टीएमसी की संसदीय पार्टी में भी दोहराया जाएगा। कबीर ने स्पष्ट रूप से कहा कि आने वाले इस बड़े राजनीतिक तूफान का सामना करने के लिए ममता बनर्जी को मानसिक और रणनीतिक रूप से पूरी तरह तैयार रहना चाहिए।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में ममता बनर्जी की अनिवार्यता
विधायक हुमायूं कबीर का मानना है कि पश्चिम बंगाल की मौजूदा डांवाडोल राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए ममता बनर्जी का सदन यानी विधानसभा में उपस्थित होना बेहद अनिवार्य है। उनके दृष्टिकोण के अनुसार, राज्य की राजनीति में ममता बनर्जी के कद और उनकी अहमियत को आज भी किसी भी स्तर पर नकारा नहीं जा सकता। कबीर ने तर्क दिया कि ममता बनर्जी केवल एक राज्य की नेता नहीं हैं, बल्कि देश की विपक्षी राजनीति के सबसे प्रमुख और कद्दावर चेहरों में से एक हैं। ऐसे में एक कुशल और मजबूत विपक्ष की आवाज को बुलंद रखने के लिए उनका विधानसभा के भीतर मौजूद रहना राज्य के हित में है।
नंदीग्राम बनाम रेजिनगर: हुमायूं कबीर का राजनीतिक समीकरण
ममता बनर्जी को न्योता देने के पीछे के गणित को समझाते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि नंदीग्राम जैसी कठिन और ध्रुवीकृत सीट पर दोबारा चुनाव लड़ना और जीतना ममता बनर्जी के लिए बेहद मुश्किल साबित हो सकता है। इसके विपरीत, रेजिनगर विधानसभा क्षेत्र का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह अलग है। हुमायूं ने दावा किया कि रेजिनगर क्षेत्र की जनता पर उनका व्यक्तिगत प्रभाव और जमीनी पकड़ इतनी मजबूत है कि वह वहां से किसी भी प्रत्याशी को ऐतिहासिक जीत दिलाने की क्षमता रखते हैं। कबीर ने यह भी साफ किया कि यदि ममता बनर्जी उनसे व्यक्तिगत रूप से इस विषय पर अनुरोध करती हैं, तो वह तुरंत उनकी मुख्यधारा की राजनीति और विधानसभा में वापसी का पूरा प्रबंध कर देंगे।
रेजिनगर में हुमायूं कबीर का अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन
अपनी बात को वजन देने के लिए हुमायूं कबीर ने क्षेत्र में अपनी पुरानी जीतों और राजनीतिक पैठ का भी हवाला दिया। उन्होंने गर्व से याद दिलाया कि पूर्व में उन्होंने रेजिनगर सीट पर तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार को बहुत बड़े अंतर से शिकस्त दी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने इसी क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को भी करारी शिकस्त देते हुए भारी मतों के अंतर से चुनाव हराया था। इसी मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर उन्हें अटूट भरोसा है कि भविष्य में भी स्थानीय जनता के भारी समर्थन की बदौलत वे इस सीट पर किसी भी समीकरण को पलटने का माद्दा रखते हैं। कबीर का मानना है कि उनकी यह ताकत ममता बनर्जी के राजनीतिक पुनर्वास में सबसे बड़ी मददगार साबित हो सकती है।
पार्टी नेतृत्व की अनदेखी और टीएमसी की वर्तमान दुर्दशा पर कटाक्ष
अपने बयानों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए कबीर ने तृणमूल कांग्रेस की मौजूदा सांगठनिक स्थिति और शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर तीखे कटाक्ष किए। उन्होंने दावा किया कि वे आज ही नहीं, बल्कि पिछले काफी समय से पार्टी को कई तरह की गंभीर राजनीतिक चेतावनियां दे रहे थे। कबीर के मुताबिक, उनके द्वारा समय-समय पर दिए गए सुझावों और चेतावनियों को पार्टी आलाकमान ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और उन्हें कोई अहमियत नहीं दी। कबीर ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि शीर्ष नेतृत्व की इसी घमंडी सोच और रणनीतिक चूक का नतीजा आज पूरी तृणमूल कांग्रेस को भुगतना पड़ रहा है।
‘धृतराष्ट्र’ की भूमिका में ममता और अभिषेक का बढ़ता विरोध
हुमायूं कबीर ने टीएमसी के भीतर जारी अंदरूनी कलह की मुख्य वजह पर से पर्दा उठाते हुए एक बड़ा आरोप लगाया। उनका सीधा दावा है कि ममता बनर्जी किसी भी कीमत पर अभिषेक बनर्जी को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाना चाहती थीं। इस संदर्भ में उन्होंने ममता बनर्जी की तुलना महाभारत के पात्र ‘धृतराष्ट्र’ से कर दी। कबीर ने कहा कि पुत्र-मोह या उत्तराधिकारी के मोह में ममता का व्यवहार पूरी तरह धृतराष्ट्र जैसा हो गया था, जिसके कारण वे जमीनी हकीकत को नहीं देख पाईं। इसी अंधमोह के चलते पूरी पार्टी वास्तविक राजनीतिक असलियत और जनता की नब्ज से कोसों दूर चली गई, जिसका हश्र सबके सामने है।
चुनावी हार के बाद टीएमसी के भीतर गहराता आंतरिक संकट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अप्रत्याशित नतीजों के घोषित होने के बाद से ही राज्य की सियासत का पूरा परिदृश्य तेजी से बदल गया है। तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद से ही पार्टी के भीतर संगठनात्मक फूट और असंतोष की अटकलें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। पार्टी के कई मौजूदा और प्रभावी विधायक अब खुलकर वर्तमान लीडरशिप और उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। ऐसे नाजुक और विस्फोटक माहौल में हुमायूं कबीर द्वारा दिए गए इस बयान ने राज्य की राजनीतिक बहस को एक नया और बेहद दिलचस्प मोड़ दे दिया है, जिससे टीएमसी बैकफुट पर नजर आ रही है।
आलोचना के बावजूद ममता बनर्जी के राष्ट्रीय कद का सम्मान
इन तमाम तीखी आलोचनाओं, गंभीर आरोपों और पार्टी नेतृत्व पर हमलों के बावजूद, हुमायूं कबीर ममता बनर्जी के व्यक्तिगत और राजनीतिक कद को छोटा आंकने से साफ हिचकिचा रहे हैं। कबीर ने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी को लेकर उनका विरोध नीतिगत है, व्यक्तिगत नहीं। उनके दृष्टिकोण में ममता बनर्जी सिर्फ किसी एक प्रादेशिक राजनीतिक दल की नेता मात्र नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान रखने वाली बेहद कद्दावर राजनीतिक हस्ती हैं। यही कारण है कि हुमायूं कबीर का दृढ़ विश्वास है कि ममता जैसी कद्दावर नेत्री का विधानसभा जैसी लोकतांत्रिक संस्था से बाहर रहना पश्चिम बंगाल की समग्र राजनीति के भविष्य के लिए किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

