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PM Modi Middle East: खाड़ी युद्ध पर पीएम मोदी की ओमान और मलेशिया से बातचीत, शांति की अपील

PM Modi Middle East

PM Modi Middle East:  28 फरवरी 2026 को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति बनी हुई है। मिडिल ईस्ट में जारी इस भीषण तनाव और अस्थिरता को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को बड़ी कूटनीतिक सक्रियता दिखाई। पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से टेलीफोन पर विस्तार से बातचीत की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को कम करना और क्षेत्र में शांति व स्थिरता की शीघ्र बहाली सुनिश्चित करना था। भारत इस संकट में एक तटस्थ और शांतिप्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाता नजर आ रहा है।

PM Modi Middle East: ओमान के सुल्तान के साथ बातचीत और ईद की शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ अपनी बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। उन्होंने ओमान के लोगों को ईद-उल-फितर की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा पर चिंता जताई। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए केवल संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की भारत द्वारा की गई निंदा को दोहराया और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए ओमान द्वारा किए गए सहयोग की सराहना की।

PM Modi Middle East: होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन की आवश्यकता

इस महत्वपूर्ण बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह समुद्री मार्ग जीवन रेखा के समान है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर पैदा हुए खतरों को देखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत और ओमान दोनों ही अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सुनिश्चित करना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है कि तेल और गैस की आपूर्ति में कोई बाधा न आए।

मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ चर्चा

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ हुई बातचीत में भी पीएम मोदी ने ईद की शुभकामनाएं दीं और पश्चिम एशिया की “बेहद चिंताजनक” स्थिति पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कूटनीतिक माध्यमों से तनाव को कम करने और क्षेत्र में शांति की शीघ्र बहाली के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। मलेशिया और भारत के बीच यह संवाद दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया के देशों की एकजुटता को भी दर्शाता है।

वैश्विक नेताओं के साथ लगातार संपर्क में भारत

उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान के सुल्तान से दूसरी बार बातचीत की है। भारत इस संकट को लेकर अत्यंत गंभीर है और पीएम मोदी अब तक सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इजरायल और ईरान सहित दुनिया के कई प्रभावशाली नेताओं से संपर्क साध चुके हैं। भारत की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य इस समय अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वैश्विक ऊर्जा संकट को टालने के लिए युद्धविराम की दिशा में प्रयास करना है।

शांति और स्थिरता की ओर बढ़ता भारत का कदम

मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक शांति के लिए खतरा बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ओमान और मलेशिया के नेतृत्व से की गई यह बातचीत दर्शाती है कि भारत वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। संवाद और कूटनीति पर भारत का जोर यह स्पष्ट करता है कि युद्ध के इस दौर में भी शांति की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। आने वाले दिनों में भारत अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ मिलकर इस तनाव को समाप्त करने के लिए और अधिक सक्रिय प्रयास कर सकता है।

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