Ram Rahim Verdict: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को लेकर एक बहुत बड़ी कानूनी खबर सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में राम रहीम और अन्य तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। निचली अदालत (सीबीआई कोर्ट) द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। जस्टिस दीपक सिब्बल और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने सबूतों के अभाव और कानूनी बारीकियों को देखते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। इस फैसले के बाद डेरा समर्थकों में खुशी की लहर है, जबकि पीड़ित परिवार ने इस पर निराशा जताई है।
Ram Rahim Verdict: क्या था पूरा मामला: साल 2002 की वो खौफनाक वारदात
यह मामला साल 2002 का है, जब सिरसा के निर्भीक पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। छत्रपति अपने अखबार ‘पूरा सच’ में डेरा सच्चा सौदा के भीतर हो रहे अनैतिक कार्यों और साध्वियों के साथ यौन शोषण की खबरों को प्रमुखता से छाप रहे थे। आरोप था कि इन खबरों से नाराज होकर डेरा प्रमुख के इशारे पर उनकी हत्या की साजिश रची गई। गोली लगने के कई दिनों बाद दिल्ली के अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया था। इस मामले ने पूरे देश का ध्यान खींचा था और प्रेस की आजादी पर हमले के रूप में देखा गया था।
Ram Rahim Verdict: निचली अदालत की सजा और लंबी कानूनी लड़ाई
साल 2019 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने गुरमीत राम रहीम, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को इस हत्याकांड का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सीबीआई ने अपनी जांच में दावा किया था कि राम रहीम के आदेश पर ही छत्रपति को रास्ते से हटाया गया। हालांकि, राम रहीम के वकीलों ने शुरू से ही इन आरोपों को निराधार बताया था। हाई कोर्ट में दी गई दलीलों में कहा गया कि सीबीआई के पास सीधे तौर पर राम रहीम को हत्या से जोड़ने वाले पुख्ता सबूत नहीं हैं और गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास है।
हाई कोर्ट के फैसले के मुख्य आधार
अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर गौर किया कि क्या केवल ‘साजिश’ के संदेह के आधार पर किसी को उम्रकैद दी जा सकती है। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि मुख्य शूटरों और राम रहीम के बीच की कड़ी को सीबीआई साबित करने में विफल रही है। हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन किया और पाया कि अभियोजन पक्ष अपना मामला ‘संदेह से परे’ साबित नहीं कर पाया। इसी तकनीकी और साक्ष्य संबंधी कमी के कारण अदालत ने सजा को रद्द करते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
राम रहीम की वर्तमान स्थिति और अन्य मामले
हालांकि छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को बड़ी राहत मिली है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह तुरंत जेल से बाहर आ जाएंगे। राम रहीम वर्तमान में रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है, जहाँ वह दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। इसके अलावा, उसे रणजीत सिंह हत्याकांड में भी सजा सुनाई गई थी, जिसमें हाल ही में उसे हाई कोर्ट से राहत मिली थी। राम रहीम अक्सर पैरोल और फरलो पर बाहर आता रहता है, जो हमेशा विवादों का विषय रहता है।
पीड़ित परिवार का पक्ष और भविष्य की राह
रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने इस फैसले पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने सच्चाई के लिए अपनी जान दी और वे इस कानूनी लड़ाई को हारने वाले नहीं हैं। पीड़ित परिवार अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है। अंशुल का कहना है कि वे न्याय के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे। इस मामले ने एक बार फिर भारत की न्याय प्रणाली में निचली अदालतों और उच्च अदालतों के फैसलों के बीच के अंतर को चर्चा में ला दिया है।
