शिलाजीत कई प्रकार की आती है जैसे गोल्ड ग्रेड, सिल्वर ग्रेड और आयरन ग्रेड। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार शुद्ध और रासायनिक मिलावट से मुक्त ‘गोल्ड ग्रेड शिलाजीत’ पुरुषों के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है। यह हिमालय की ऊंची पहाड़ियों से प्राप्त की जाती है, जहां इसकी गुणवत्ता सर्वोत्तम होती है। अच्छी शिलाजीत की पहचान है इसका प्राकृतिक गाढ़ा रंग, तार की तरह खिंचाव और पानी में पूरी तरह घुल जाना। नकली शिलाजीत शरीर पर विपरीत असर डाल सकती है, इसलिए हमेशा किसी प्रमाणित आयुर्वेदिक ब्रांड से ही लें।
क्या शिलाजीत टाइमिंग बढ़ाता है?
आयुर्वेद के अनुसार, शिलाजीत वीर्य को गाढ़ा करने, ऊर्जा और स्टेमिना बढ़ाने के लिए जानी जाती है। यह सीधे तौर पर समय बढ़ाने का दावा नहीं करती, लेकिन शरीर की थकान और कमजोरी को कम कर पुरुषों को ज्यादा सक्रिय बनाती है। इससे आत्मविश्वास भी बढ़ता है, जो परफॉर्मेंस में सुधार लाता है। लगातार थकान, मानसिक तनाव और कमजोरी के कारण होने वाली समस्या में शिलाजीत बहुत उपयोगी है। ध्यान रखें, इसका असर शरीर की प्रकृति पर निर्भर करता है, इसलिए इसे आयुर्वेदाचार्य की सलाह से ही लें।
शिलाजीत कब नहीं खाना चाहिए?
शिलाजीत के सेवन से पहले अपने स्वास्थ्य की पूरी जांच जरूर करवाएं। जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर, गंभीर हृदय रोग, बुखार या संक्रमण हो, उन्हें शिलाजीत का सेवन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और जिनका पाचन तंत्र बहुत कमजोर है, उन्हें भी इससे परहेज करना चाहिए। किसी भी सर्जरी के तुरंत बाद भी शिलाजीत से दूरी बनाएं।
अधिक शिलाजीत खाने के क्या नुकसान हैं?
अधिक मात्रा में शिलाजीत लेने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे जलन, चक्कर आना, हाइपरटेंशन और नींद की समस्या हो सकती है। कुछ लोगों में पेट दर्द, डायरिया और उल्टी जैसी समस्याएं भी देखी गई हैं। यह किडनी और लिवर पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही प्रयोग करें।
आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की राय
आयुर्वेदिक चिकित्सक मानते हैं कि शिलाजीत पुरुषों में शारीरिक ताकत, मानसिक संतुलन और प्रजनन क्षमता बढ़ाने में कारगर है, लेकिन इसकी मात्रा और समय का पालन करना जरूरी है। सुबह खाली पेट या रात को दूध के साथ सीमित मात्रा में ही लें और नियमित व्यायाम करें।
शिलाजीत कैसे लें और किसके साथ लें?
आमतौर पर शिलाजीत का सेवन दूध, शहद या गुनगुने पानी के साथ करना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे इसके पोषक तत्व जल्दी अवशोषित होते हैं। दिन में एक बार, करीब 300-500 मिग्रा की मात्रा काफी है।
शिलाजीत के सेवन से कितने दिनों में फर्क दिखता है?
अगर नियमित रूप से सही मात्रा में लिया जाए तो 4-6 हफ्ते में ऊर्जा, स्टेमिना और मानसिक सक्रियता में फर्क दिखने लगता है। यह व्यक्ति की आयु, शरीर की प्रकृति और लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करता है।
शिलाजीत के प्रकार और उनका चुनाव कैसे करें?
शिलाजीत के मुख्य प्रकार हैं सोना युक्त (स्वर्णयुक्त), चांदी युक्त (रजतयुक्त), ताम्रयुक्त (कॉपर) और लौहयुक्त (आयरन)। आयुर्वेद में गोल्ड ग्रेड शिलाजीत को सबसे शुद्ध और असरदार माना जाता है। मार्केट में नकली या केमिकल से मिली-जुली शिलाजीत भी खूब बिकती है, जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है। असली शिलाजीत पानी में पूरी तरह घुलती है और उसमें से मिट्टी जैसी महक आती है। अगर आप शिलाजीत खरीदने जा रहे हैं, तो हमेशा प्रमाणित ब्रांड, GMP सर्टिफाइड और लैब टेस्टेड प्रोडक्ट ही चुनें। इससे न केवल स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा, बल्कि असली शिलाजीत के फायदे भी मिलेंगे।
शिलाजीत के साथ क्या न खाएं?
शिलाजीत गर्म तासीर वाली औषधि है। इसलिए इसके साथ ज्यादा मसालेदार, तली-भुनी या बहुत गर्म चीजें न खाएं। इससे शरीर में अत्यधिक गर्मी बढ़ सकती है। शराब, सिगरेट या नशे की चीजों के साथ शिलाजीत का सेवन बिलकुल न करें, वरना इसके असर कम या उल्टे भी हो सकते हैं। साथ ही, ज्यादा मात्रा में चाय और कॉफी भी न लें। सर्दी-जुकाम या बुखार होने पर भी शिलाजीत का सेवन रोक देना चाहिए।
शिलाजीत कब और कितने समय तक लेना चाहिए?
शिलाजीत को सुबह खाली पेट या रात में सोने से पहले गुनगुने दूध या शहद के साथ लेना सबसे अच्छा होता है। इसे एक बार में करीब 300-500 मिग्रा (मटर के दाने जितना) लेना चाहिए। आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, शिलाजीत का कोर्स 2-3 महीने तक चल सकता है, फिर कुछ हफ्तों का ब्रेक लेकर दोबारा शुरू किया जा सकता है। लम्बे समय तक निरंतर सेवन से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, इसलिए बीच-बीच में ब्रेक ज़रूरी है।
शिलाजीत के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से फायदे
आयुर्वेद के अलावा आधुनिक रिसर्च भी मानती है कि शिलाजीत में फुल्विक एसिड और मिनरल्स होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। यह ऊर्जा उत्पादन में मदद करता है, जिससे थकान कम होती है। कुछ शोध बताते हैं कि शिलाजीत टेस्टोस्टेरोन के स्तर को भी संतुलित कर सकती है, जिससे पुरुषों में स्टेमिना और पावर बढ़ती है। इसके अलावा, यह मेमोरी और ध्यान शक्ति पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
शिलाजीत खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
सबसे पहले ब्रांड की विश्वसनीयता देखें। प्रोडक्ट पर लेबोरेट्री टेस्ट रिपोर्ट, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट होनी चाहिए। नकली या सस्ती शिलाजीत से बचें क्योंकि इनमें हानिकारक केमिकल या भारी धातु मिल सकती है। हमेशा जानी-मानी आयुर्वेदिक कंपनियों या ऑथेंटिक स्टोर्स से ही खरीदें। पैकेजिंग पर ‘शुद्ध’ और ‘प्राकृतिक’ लिखा होना काफी नहीं है, उसकी लैब टेस्ट रिपोर्ट देखना जरूरी है।
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