Diwali 2026 : आज 8 नवंबर, रविवार को देशभर में दीपावली का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में दिवाली को सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शाम और रात के समय मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात विधि-विधान से माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-शांति और धन-धान्य की कामना की जाती है। यही कारण है कि भक्त इस विशेष अवसर पर माता को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ और मंत्र जाप करते हैं।
समय कम है तो करें मां लक्ष्मी के 108 नामों का स्मरण
कई बार व्यस्तता या किसी अन्य कारण से लोगों के लिए दिवाली पर विस्तार से पूजा करना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में निराश होने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भक्त श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी के 108 नामों का जाप करके भी उनका स्मरण कर सकते हैं। माता के इन नामों को अष्टोत्तर शतनामावली कहा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन और एकाग्रता से इन नामों का जाप करने से भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इन नामों में मां लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों, शक्तियों और गुणों का वर्णन मिलता है।
मां लक्ष्मी के 108 नामों में छिपा है विशेष धार्मिक महत्व
मां लक्ष्मी की अष्टोत्तर शतनामावली में प्रकृति, विद्या, श्रद्धा, विभूति, पद्मा, कमला, हरिवल्लभा, करुणा, शांति, पुष्टि, सिद्धि और शुभप्रदा जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा पद्मालया, पद्महस्ता, पद्माक्षी, पद्मसुंदरी, चंद्रवदना, इंदिरा, धनधान्यकरी, वरलक्ष्मी, विष्णुपत्नी, दारिद्र्यनाशिनी और भुवनेश्वरी जैसे नाम भी माता के अलग-अलग स्वरूपों का स्मरण कराते हैं।
इस शतनामावली में कुल 108 नाम हैं। प्रत्येक नाम के उच्चारण के साथ भक्त ‘ॐ’ और ‘नमः’ लगाकर माता को नमन करते हैं। पूरी सूची का पाठ श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण के साथ किया जा सकता है।
मां लक्ष्मी के 108 नामों का जाप करने की सही विधि
1. स्नान और शुद्धता: जाप शुरू करने से पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। धार्मिक परंपरा में लाल या पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
2. पूजा स्थल की सफाई: घर के मंदिर या पूजा स्थान को स्वच्छ करें। मां लक्ष्मी की प्रतिमा अथवा तस्वीर के सामने आसन लगाकर बैठें और दीपक तथा धूपबत्ती जलाएं।
3. पुष्प अर्पित करें: माता के चरणों में कमल का फूल या लाल गुलाब चढ़ाएं। इसके बाद हाथ जोड़कर मां लक्ष्मी का ध्यान करें।
4. माला का इस्तेमाल: 108 नामों का जाप करने के लिए कमलगट्टे या स्फटिक की माला का उपयोग किया जा सकता है।
5. श्रद्धापूर्वक करें जाप: माता के सभी 108 नामों का एक बार ध्यानपूर्वक उच्चारण करें। जाप के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखें।
जाप करने का शुभ समय क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी के नामों का जाप सुबह ब्रह्म मुहूर्त यानी लगभग 4 से 6 बजे के बीच या शाम के प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। हालांकि, दिवाली की रात भी भक्त अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार माता के नामों का स्मरण कर सकते हैं। पूजा के समय मन में सकारात्मक भाव रखें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की कामना करें।
मां लक्ष्मी के 108 नामों की पूरी सूची
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ॐ प्रकृत्यै नमः।
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ॐ विकृत्यै नमः।
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ॐ विद्यायै नमः।
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ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः।
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ॐ श्रद्धायै नमः।
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ॐ विभूत्यै नमः।
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ॐ सुरभ्यै नमः।
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ॐ परमात्मिकायै नमः।
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ॐ वाचे नमः।
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ॐ पद्मालयायै नमः।
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ॐ पद्मायै नमः।
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ॐ शुचये नमः।
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ॐ स्वाहायै नमः।
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ॐ स्वधायै नमः।
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ॐ सुधायै नमः।
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ॐ धन्यायै नमः।
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ॐ हिरण्मय्यै नमः।
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ॐ लक्ष्म्यै नमः।
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ॐ नित्यपुष्टायै नमः।
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ॐ विभावर्यै नमः।
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ॐ अदित्यै नमः।
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ॐ दित्यै नमः।
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ॐ दीपायै नमः।
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ॐ वसुधायै नमः।
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ॐ वसुधारिण्यै नमः।
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ॐ कमलायै नमः।
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ॐ कान्तायै नमः।
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ॐ कामाक्ष्यै नमः।
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ॐ क्षीरोदसम्भवायै नमः।
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ॐ अनुग्रहप्रदायै नमः।
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ॐ बुद्धये नमः।
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ॐ अनघायै नमः।
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ॐ हरिवल्लभायै नमः।
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ॐ अशोकायै नमः।
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ॐ अमृतायै नमः।
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ॐ दीप्तायै नमः।
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ॐ लोकशोकविनाशिन्यै नमः।
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ॐ धर्मनिलयायै नमः।
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ॐ करुणायै नमः।
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ॐ लोकमात्रे नमः।
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ॐ पद्मप्रियायै नमः।
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ॐ पद्महस्तायै नमः।
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ॐ पद्माक्ष्यै नमः।
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ॐ पद्मसुन्दर्यै नमः।
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ॐ पद्मोद्भवायै नमः।
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ॐ पद्ममुख्यै नमः।
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ॐ पद्मनाभप्रियायै नमः।
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ॐ रमायै नमः।
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ॐ पद्ममालाधरायै नमः।
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ॐ देव्यै नमः।
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ॐ पद्मिन्यै नमः।
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ॐ पद्मगन्धिन्यै नमः।
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ॐ पुण्यगन्धायै नमः।
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ॐ सुप्रसन्नायै नमः।
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ॐ प्रसादाभिमुख्यै नमः।
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ॐ प्रभायै नमः।
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ॐ चन्द्रवदनायै नमः।
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ॐ चन्द्रायै नमः।
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ॐ चन्द्रसहोदर्यै नमः।
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ॐ चतुर्भुजायै नमः।
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ॐ चन्द्ररूपायै नमः।
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ॐ इन्दिरायै नमः।
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ॐ इन्दुशीतलायै नमः।
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ॐ आह्लादजनन्यै नमः।
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ॐ पुष्ट्यै नमः।
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ॐ शिवायै नमः।
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ॐ शिवकर्यै नमः।
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ॐ सत्यायै नमः।
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ॐ विमलायै नमः।
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ॐ विश्वजनन्यै नमः।
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ॐ तुष्ट्यै नमः।
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ॐ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः।
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ॐ प्रीतिपुष्करिण्यै नमः।
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ॐ शान्तायै नमः।
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ॐ शुक्लमाल्याम्बरायै नमः।
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ॐ श्रियै नमः।
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ॐ भास्कर्यै नमः।
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ॐ बिल्वनिलयायै नमः।
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ॐ वरारोहायै नमः।
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ॐ यशस्विन्यै नमः।
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ॐ वसुन्धरायै नमः।
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ॐ उदाराङ्गायै नमः।
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ॐ हरिण्यै नमः।
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ॐ हेममालिन्यै नमः।
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ॐ धनधान्यकर्यै नमः।
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ॐ सिद्धये नमः।
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ॐ स्त्रैणसौम्यायै नमः।
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ॐ शुभप्रदायै नमः।
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ॐ नृपवेश्मगतानन्दायै नमः।
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ॐ वरलक्ष्म्यै नमः।
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ॐ वसुप्रदायै नमः।
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ॐ शुभायै नमः।
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ॐ हिरण्यप्राकारायै नमः।
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ॐ समुद्रतनयायै नमः।
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ॐ जयायै नमः।
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ॐ मङ्गलादेव्यै नमः।
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ॐ विष्णुवक्षस्स्थलस्थितायै नमः।
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ॐ विष्णुपत्न्यै नमः।
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ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः।
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ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः।
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ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः।
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ॐ देव्यै नमः।
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ॐ सर्वोपद्रववारिण्यै नमः।
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ॐ नवदुर्गायै नमः।
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ॐ महाकाल्यै नमः।
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ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः।
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ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमः।
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ॐ भुवनेश्वर्यै नमः।

