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Brazil Election 2026: लूला डी सिल्वा की ऐतिहासिक जीत, चौथी बार बनेंगे राष्ट्रपति

Brazil Election 2026

Brazil Election 2026 : ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला डी सिल्वा ने 25 अक्टूबर 2026 को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी और सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो को हराकर चौथा, गैर-लगातार राष्ट्रपति कार्यकाल हासिल किया। 80 वर्षीय लूला की यह जीत पहले चरण में पिछड़ने के बाद आई है। चुनाव परिणामों ने ब्राजील की राजनीति में एक बार फिर वामपंथी और दक्षिणपंथी विचारधाराओं के बीच गहरे मतभेदों को उजागर किया।

वोटों की गिनती में लूला को मिली बढ़त

ब्राजील की चुनावी संस्था के शुरुआती परिणामों के अनुसार, लगभग 97.69 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने पर लूला को 51.74 प्रतिशत और फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.26 प्रतिशत वोट मिले थे। बाद में पूरी मतगणना के साथ लूला की जीत की पुष्टि हुई। अंतिम परिणामों में उन्हें लगभग 51.8 प्रतिशत और फ्लेवियो को 48.2 प्रतिशत मत मिले। दोनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा और परिणाम ने देश के राजनीतिक विभाजन को फिर सामने ला दिया।

पहले चरण में फ्लेवियो बोल्सोनारो आगे थे

इस चुनाव का पहला चरण 4 अक्टूबर को हुआ था, जिसमें फ्लेवियो बोल्सोनारो ने लूला से अधिक वोट हासिल किए थे। इसके बाद दोनों उम्मीदवारों के बीच दूसरे चरण का मुकाबला हुआ। फ्लेवियो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं और ब्राजील के सीनेटर भी हैं। उनके अभियान में कानून-व्यवस्था, करों और आर्थिक नीतियों जैसे मुद्दे प्रमुख रहे, जबकि लूला ने सामाजिक कल्याण और अपनी सरकार की नीतियों को केंद्र में रखा। दूसरे चरण में लूला ने बढ़त हासिल कर चुनाव जीत लिया।

मतदान व्यवस्था को लेकर विवाद

मतदान के दिन परिवहन संबंधी बाधाओं और खराब मौसम को लेकर विवाद सामने आया। लूला ने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में सार्वजनिक बसों की आवाजाही धीमी किए जाने से मतदाताओं को परेशानी हुई। दूसरी ओर, फ्लेवियो के समर्थकों ने बारिश और बाढ़ के कारण मतदान प्रभावित होने की शिकायत की। इन आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए। मतदान का समय बढ़ाने के न्यायिक आदेश के बाद भी कुछ मतदान केंद्रों पर प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बनी। इन घटनाओं ने चुनावी व्यवस्था और मतदान की सुचारु प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

लूला की जीत का अंतरराष्ट्रीय असर

लूला की जीत का असर ब्राजील की विदेश नीति और प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ संबंधों पर भी पड़ सकता है। लूला ने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की आलोचना की है और चीन के साथ आर्थिक सहयोग को महत्व दिया है। दूसरी ओर, फ्लेवियो बोल्सोनारो को अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीति के करीब माना जाता है। हालांकि, ब्राजील की भविष्य की विदेश नीति का वास्तविक स्वरूप सरकार की घोषणाओं और उसके फैसलों से ही स्पष्ट होगा। चुनाव परिणाम लैटिन अमेरिका में राजनीतिक रुझानों को समझने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चौथे कार्यकाल में लूला के सामने चुनौतियां

चुनाव जीतने के बाद लूला के सामने आर्थिक विकास, महंगाई, सार्वजनिक सुरक्षा और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसी चुनौतियां रहेंगी। संसद में विभिन्न राजनीतिक समूहों के बीच सहमति बनाना भी उनकी सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा। न्यायपालिका और अन्य संस्थानों के साथ संबंधों पर भी नजर रहेगी। लूला का नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होना निर्धारित है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह चुनावी वादों को नीतियों में कैसे बदलते हैं और देश के विभाजित राजनीतिक माहौल में शासन चलाने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।

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