SCO Summit 2026 : किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताओं को संबोधित करेंगे। उनके भाषण पर भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजरें टिकी हुई हैं। वैश्विक राजनीति, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आपसी संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सम्मेलन में चर्चा होने की उम्मीद है।
मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात से बढ़ी हलचल
SCO सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग की संभावित मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत हो सकती है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी उन्हें इसी महीने दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित कर सकते हैं।
फैमिली फोटो के दौरान मोदी-पुतिन-जिनपिंग साथ दिखे
सम्मेलन के दौरान नेताओं की पारंपरिक ‘फैमिली फोटो’ के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संक्षिप्त बातचीत भी दिखाई दी। तीनों नेताओं की यह मुलाकात भले ही छोटी रही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे काफी अहम माना जा रहा है। भारत, चीन और रूस के बीच संबंधों को देखते हुए ऐसे अनौपचारिक संवाद भी चर्चा का विषय बन जाते हैं।
SCO से इतर नेताओं की राउंडटेबल बैठक
बिश्केक स्थित यरीस ओर्दो कांग्रेस हॉल में SCO शिखर सम्मेलन से इतर सदस्य देशों के नेताओं की राउंडटेबल चर्चा भी आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता मेजबान देश किर्गिस्तान के राष्ट्रपति और SCO के मौजूदा अध्यक्ष सदिर जापारोव ने की। इस बैठक में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद
SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव और ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन भी सम्मेलन का हिस्सा हैं।
10 सदस्य देशों वाला बड़ा अंतरराष्ट्रीय संगठन
शंघाई सहयोग संगठन में फिलहाल 10 सदस्य देश शामिल हैं। इसके अलावा संगठन के साथ 15 पार्टनर और दो ऑब्जर्वर देश भी जुड़े हुए हैं। SCO का यह सम्मेलन क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर संवाद तथा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। संगठन के सदस्य देश आपसी हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर सहयोग बढ़ाने के लिए साझा मंच का इस्तेमाल करते हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में SCO की बड़ी भूमिका
SCO के 10 सदस्य देश मिलकर दुनिया की करीब 25 प्रतिशत GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, मित्रता और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मजबूत करना है। इसके साथ ही क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता कायम रखने के लिए बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जाता है।
सुरक्षा से आर्थिक सहयोग तक कई मुद्दे अहम
SCO के एजेंडे में आतंकवाद और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटना, आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना तथा सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को गति देना शामिल है। संगठन सदस्य देशों के बीच ऐसे क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करता है, जिससे सभी पक्षों को पारस्परिक लाभ मिल सके। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इन मुद्दों की अहमियत और बढ़ गई है।
SCO Plus प्रारूप में बढ़ा सम्मेलन का दायरा
इस बार सम्मेलन को विस्तारित ‘SCO Plus’ प्रारूप में भी आयोजित किया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत SCO के नियमित सदस्य देशों के अलावा अन्य संबंधित देशों के शीर्ष नेताओं को भी मंच पर आमंत्रित किया गया है। इससे सम्मेलन का दायरा और व्यापक हो गया है तथा विभिन्न क्षेत्रों के देशों के बीच संवाद का अवसर बढ़ा है।
कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष SCO Plus में शामिल
SCO Plus प्रारूप में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन, अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान, मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख, लाओस के राष्ट्रपति थोंगलोन सिसोलिथ और टोगो के राष्ट्रपति फॉरे ग्नासिंगबे समेत कई नेता हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में बिश्केक सम्मेलन सिर्फ SCO देशों तक सीमित न रहकर व्यापक अंतरराष्ट्रीय संवाद का मंच बन गया है।
मोदी के संबोधन और संभावित मुलाकात पर नजर
अब सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन और उनकी संभावित शी जिनपिंग मुलाकात पर खास नजर रहेगी। यदि दोनों नेताओं के बीच बैठक होती है, तो इसमें द्विपक्षीय संबंधों के साथ आगामी BRICS सम्मेलन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना रहेगी। वहीं पुतिन समेत अन्य नेताओं के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत भी भारत की कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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