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Trump Iran War : ईरान युद्ध पर ट्रम्प को बड़ा झटका, अमेरिकी संसद ने सैन्य शक्तियों पर लगाया अंकुश

Trump Iran War

Trump Iran War :  वाशिंगटन से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है, जहाँ अमेरिकी संसद ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए ‘युद्ध शक्ति प्रस्ताव’ (War Powers Resolution) को अपनी मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इच्छा के विपरीत जाते हुए, उनकी अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सांसदों ने विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों के साथ हाथ मिला लिया। इस गठबंधन ने पिछले तीन महीनों से चल रहे उस खूनी संघर्ष को समाप्त करने का ऐतिहासिक फैसला किया है, जिसने देश और विदेश दोनों ही मोर्चों पर राजनीति की पूरी दिशा बदल कर रख दी है।

इससे पहले, संसद अध्यक्ष माइक जॉनसन ने इस प्रस्ताव को रोकने की पुरजोर कोशिश की थी और दो हफ्ते पहले सदन की कार्यवाही को अचानक स्थगित भी कर दिया था। लेकिन जैसे-जैसे ईरान के साथ यह संघर्ष लंबा खिंचता गया और ट्रंप बिना किसी ठोस नतीजे के बातचीत के लिए संघर्ष करते दिखे, वैसे-वैसे अमेरिकी सांसदों और जनता के बीच असंतोष बढ़ता ही चला गया।

‘लापरवाह और खर्चीला युद्ध आज ही खत्म हो’: संसद में गूंजी हकीम जेफ्रीज़ की आवाज

बुधवार को अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में इस प्रस्ताव पर हुए मतदान के दौरान बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिला। प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विरोध में 208 वोट पड़े, जिसके बाद सदन में मौजूद शांति समर्थकों और डेमोक्रेटिक सांसदों में खुशी की लहर दौड़ गई। न्यूयॉर्क के प्रमुख डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज़ ने इस सप्ताह की शुरुआत में बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा था कि इस लापरवाह और खर्चीले युद्ध को आज ही खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि अमेरिकी करदाताओं के 100 अरब डॉलर से अधिक की भारी-भरकम राशि इस युद्ध की वेदी पर स्वाहा हो चुकी है। इस असाधारण और फिजूलखर्च सैन्य अभियान ने ईरान को कमजोर करने के बजाय खुद अमेरिका को वैश्विक स्तर पर एक बेहद कमजोर स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है।

विदेशों में अमेरिकी दखल का बढ़ता विरोध और अर्थव्यवस्था पर महंगाई का चौतरफा प्रहार

संसद के उच्च सदन यानी सीनेट ने भी पिछले महीने इसी तरह का एक युद्ध शक्ति प्रस्ताव पारित किया था, जहाँ चार रिपब्लिकन सीनेटरों ने राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों से खुलकर बगावत की थी। डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस की सत्ता में वापसी के लिए चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि वह विदेशों में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को पूरी तरह समाप्त करेंगे और घरेलू विकास पर ध्यान देंगे, लेकिन ईरान युद्ध ने अमेरिकी प्राथमिकताओं को फिर से मध्य पूर्व की ओर धकेल दिया है।

28 फरवरी को जब अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर सीधे हमले शुरू किए, उसके बाद से ही आम अमेरिकियों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन की आसमान छूती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। ईरान द्वारा सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के रास्ते को आंशिक रूप से बंद कर देने के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रासायनिक उर्वरकों की भारी किल्लत हो गई है, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं पर मुद्रास्फीति (महंगाई) का दबाव असहनीय हो गया है।

अप्रैल के अस्थिर युद्धविराम के बाद भी दोनों देशों के बीच जारी है सैन्य टकराव

हालांकि, इसी साल अप्रैल के महीने में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा की गई थी, लेकिन सीमा पर जमीनी स्थिति अब भी बेहद अस्थिर और अप्रत्याशित बनी हुई है। इस लड़ाई के किसी स्थायी समाधान तक पहुंचने की बातचीत बहुत लंबी खिंच गई है। यह संकट तब और ज्यादा जटिल हो गया जब लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह लड़ाकों के साथ इजरायल का एक नया और भीषण युद्ध शुरू हो गया। इस क्षेत्रीय अशांति के बीच, पर्दे के पीछे अमेरिका और ईरान की सेनाओं द्वारा एक-दूसरे के रणनीतिक ठिकानों पर छिटपुट सैन्य हमले और ड्रोन कार्रवाइयां लगातार जारी हैं, जिससे शांति की उम्मीदें धुंधली हो रही हैं।

प्रस्ताव के पारित होने के बाद कानूनी विवाद और अमेरिका-ईरान युद्ध का भविष्य

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा पारित यह युद्ध शक्ति प्रस्ताव भले ही युद्ध को तुरंत कानूनी रूप से नहीं रोक पाएगा, लेकिन यह राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों के खिलाफ कांग्रेस का एक बहुत बड़ा प्रतीकात्मक और राजनीतिक कदम है। अब यह प्रस्ताव अंतिम निर्णय के लिए सीनेट के पास जाएगा। दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ‘हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी’ के सामने गवाही देते हुए चेतावनी दी है कि इस प्रस्ताव से ईरानी सरकार को यह संदेश जाएगा कि अमेरिकी प्रशासन के हाथ बंध चुके हैं, जिससे वे शांति समझौते के लिए कभी आगे नहीं आएंगे।

अमेरिकी संविधान के तहत युद्ध की आधिकारिक घोषणा करने का अधिकार केवल संसद (कांग्रेस) के पास है, जबकि राष्ट्रपति कमांडर-इन-चीफ के रूप में सेना का संचालन करते हैं। युद्ध शक्ति अधिनियम के अनुसार, व्हाइट हाउस को किसी भी सैन्य अभियान के लिए 60 दिनों के भीतर कांग्रेस की मंजूरी लेनी अनिवार्य होती है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन का दावा है कि युद्धविराम की घोषणा के साथ ही वास्तविक शत्रुता पहले ही समाप्त हो चुकी है।

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