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Rudraksha Rules : रुद्राक्ष धारण करने की सही विधि, जानें जरूरी पूजा नियम और विशेष सावधानियां

Rudraksha Rules

Rudraksha Rules : सनातन धर्म में रुद्राक्ष को परम पवित्र और साक्षात् शिव का स्वरूप माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। यही कारण है कि इसे धारण करने वाले भक्त पर महादेव की असीम कृपा हमेशा बनी रहती है। यदि इसके शाब्दिक अर्थ को समझें, तो ‘रुद्र’ का तात्पर्य स्वयं भगवान शिव से है और ‘अक्ष’ का अर्थ उनकी आंखें अथवा वह दिव्य दृष्टि है जो सृष्टि के हर कण को देख सकती है।

धार्मिक दृष्टिकोण से रुद्राक्ष जीवन के सभी कष्टों, दुखों और शोक को दूर करके सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है। यदि आप भी इस चमत्कारी मनके को धारण करने का विचार कर रहे हैं, तो इसके लिए शास्त्रों में बताए गए पूजा-पाठ के विधान और कड़े नियमों को जानना आपके लिए अत्यंत आवश्यक है।

रुद्राक्ष की माला खरीदने और उसकी शुद्धिकरण प्रक्रिया के नियम

बाजार से रुद्राक्ष की माला खरीदते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले माला के सभी दानों की अच्छी तरह जांच कर लें। कोई भी दाना खंडित या टूटा हुआ नहीं होना चाहिए और जप या धारण करने के लिए हमेशा 108 दानों वाली पूर्ण माला ही खरीदें। रुद्राक्ष की माला को जागृत करने के लिए किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है।

इस शुभ दिन पर एक साफ बर्तन में माला को रखकर सबसे पहले पवित्र गंगाजल से स्नान कराएं। इसके पश्चात, माला को पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का मिश्रण) में कुछ समय के लिए डुबोकर रखें। पंचगव्य से निकालने के बाद इसे पुनः गंगाजल या शुद्ध जल से अच्छी तरह धो लें और फिर एक साफ सफेद सूती कपड़े से धीरे-धीरे पोंछकर सुखा लें।

शिव पूजन और मंत्रोच्चार के साथ माला को सिद्ध करने की विधि

शुद्धिकरण के बाद, एक स्वच्छ पात्र में लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर रुद्राक्ष की माला को आदरपूर्वक स्थापित करें। इसके बाद, मन में भगवान भोलेनाथ का ध्यान करते हुए इस माला को शिवलिंग पर अर्पित कर दें। यहाँ पर माला की धूप, दीप, गंध, पुष्प और अक्षत आदि से षोडशोपचार (सोलह सामग्रियों से) विधि-विधान से पूजा करें।

पूजा संपन्न होने के बाद, माला के एक-एक मनके को अपने हाथ से स्पर्श करते हुए मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। यदि आप इस सिद्ध माला को महादेव का परम प्रसाद मानकर गले में पहनना चाहते हैं, तो शिव का स्मरण करते हुए इसे धारण कर लें। इसके बाद इसकी पवित्रता का हमेशा ध्यान रखें। वहीं, यदि आप इसे मंत्र जाप के लिए उपयोग करना चाहते हैं, तो इसे चांदी की डिब्बी में सुरक्षित रखें और महीने में कम से कम एक बार इस पर इत्र की दो बूंदें अवश्य लगाएं।

रुद्राक्ष धारण करने और मंत्र जाप से जुड़े अति महत्वपूर्ण नियम

रुद्राक्ष को गले में पहनने के लिए हमेशा लाल या पीले रंग के रेशमी या सूती धागे का ही प्रयोग करना चाहिए। भूलकर भी इसे काले धागे में पिरोकर न पहनें। यदि आप रुद्राक्ष को सोने या चांदी के फ्रेम में मढ़वा रहे हैं, तो बनावट ऐसी होनी चाहिए कि रुद्राक्ष का हिस्सा आपकी त्वचा को सीधे स्पर्श करता रहे। अपवित्र अवस्था में रुद्राक्ष धारण करना वर्जित है।

किसी के अंतिम संस्कार में जाते समय या दैनिक शौच आदि के समय माला को उतारकर किसी पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए। यदि आप इससे मंत्र जाप कर रहे हैं, तो माला को हमेशा गोमुखी (जाप थैली) के अंदर रखें और दाएं हाथ के अंगूठे के साथ मध्यमा या अनामिका उंगली का ही उपयोग करें। ध्यान रहे कि शिव पूजा में हमेशा नई माला ही चढ़ाएं; किसी दूसरे की या खुद की पहनी हुई पुरानी माला कभी भी दोबारा पूजन या धारण करने के लिए उपयोग न करें। साथ ही, रुद्राक्ष को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें।

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