New UP DGP 2026 : उत्तर प्रदेश को करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार अपना नया स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे राजीव कृष्ण को प्रदेश का नया पूर्णकालिक पुलिस कप्तान नियुक्त किया गया है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा भेजे गए तीन वरिष्ठ अधिकारियों के पैनल पर शासन स्तर पर गहन मंथन किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने राजीव कृष्ण के नाम के प्रस्ताव को अपनी अंतिम और आधिकारिक मंजूरी दे दी है, जिससे राज्य पुलिस महकमे में स्थिरता आने की उम्मीद है।
नोएडा के मूल निवासी राजीव कृष्ण का शुरुआती जीवन और शैक्षणिक योग्यता
उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के मूल निवासी राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून 1969 को हुआ था। उनके पिता का नाम एचके मित्तल है। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री (बीटेक) हासिल की है। अपनी तकनीकी और शैक्षणिक योग्यता पूरी करने के बाद उन्होंने देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा पास की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुने गए। वह 1991 बैच के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी हैं।
पुलिस सेवा में शानदार करियर और विभिन्न पदों पर समयबद्ध पदोन्नति
राजीव कृष्ण की पुलिस सेवा में आधिकारिक भर्ती 15 सितंबर 1991 को हुई थी। इसके बाद 21 अक्टूबर 1993 को उनका सेवा पुष्टीकरण हुआ और 10 अक्टूबर 1995 को उन्हें सीनियर स्केल मिला। उनके बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए 9 अगस्त 2005 को वे सिलेक्शन ग्रेड में पहुंचे। एक कुशल प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी के रूप में उनका करियर लगातार ऊंचाइयों को छूता रहा। वह 7 अगस्त 2007 को पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) और फिर 9 नवंबर 2010 को पुलिस महानिरीक्षक (IG) के पद पर प्रमोट हुए। इसके बाद 1 जनवरी 2016 को उन्हें अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) का अहम पदभार मिला।
पुलिस महानिदेशक के सर्वोच्च रैंक पर पहुंच और वर्तमान तैनाती
अपनी उत्कृष्ट और निष्पक्ष कार्यशैली के चलते राजीव कृष्ण 1 फरवरी 2024 को पुलिस महानिदेशक (DGP) के सर्वोच्च रैंक पर पदोन्नत हुए। वे उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले में DGP मुख्यालय और डीजी सतर्कता (विजिलेंस) विभाग की कमान संभाल रहे हैं, जहां उनकी इस पद पर तैनाती 31 मई 2025 को हुई थी। उनके प्रशासनिक अनुभवों का लाभ अब पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस बल को मिलेगा।
राष्ट्रपति पुलिस पदक और महानिदेशक कमेंडेशन डिस्क से हुए सम्मानित
अपने लंबे, बेदाग और शानदार सेवाकाल में राजीव कृष्ण को कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सेवा पदकों और सम्मानों से नवाजा गया है। उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विशिष्ट योगदान के लिए ‘पुलिस मेडल’ और ‘पुलिस मेडल फॉर मेधावी सेवा’ जैसे उच्च सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए देश के सर्वोच्च ‘राष्ट्रपति पुलिस पदक’ से भी नवाजा गया है। पुलिस विभाग में उनके अद्वितीय योगदान की सराहना करते हुए उन्हें डीजी (DG) का कमेंडेशन रॉल और अलग-अलग वर्षों में प्रतिष्ठित डीजी कमेंडेशन डिस्क के सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम संस्करणों से भी सम्मानित किया गया है।
उत्तर प्रदेश में ‘कार्यवाहक’ दौर की समाप्ति और सुप्रीम कोर्ट के नियम
उत्तर प्रदेश में मई 2022 से कोई भी स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नहीं था। पिछले चार सालों में कई कार्यवाहक डीजीपी बदले जा चुके हैं, जिससे पुलिस कप्तानी में निरंतरता की कमी खल रही थी। राजीव कृष्ण खुद 1 जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी का पद संभाल रहे हैं, जिन्हें अब स्थायी कमान मिलने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य के स्थायी डीजीपी को न्यूनतम 2 साल का सुरक्षित कार्यकाल मिलना अनिवार्य है। आईपीएस राजीव कृष्ण जून 2029 में सेवानिवृत्त (रिटायर) होंगे। ऐसे में नियमों के मुताबिक उन्हें प्रदेश के सबसे बड़े पुलिस पद पर एक लंबा, स्वतंत्र और स्थिर कार्यकाल मिलने की पूरी संभावना है।
देश के इन दिग्गज आईपीएस अधिकारियों के नाम भी थे रेस में शामिल
स्थायी डीजीपी बनने की इस बेहद महत्वपूर्ण दौड़ में राजीव कृष्ण के अलावा कई और वरिष्ठ और अनुभवी आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चा में थे। इनमें पहला नाम 1990 बैच की सीनियर आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा का था। दूसरा नाम आलोक शर्मा का था, जो 1991 बैच के आईपीएस हैं और वर्तमान में केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के डायरेक्टर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। तीसरा नाम पीयूष आनंद का था, जो 1991 बैच के ही आईपीएस अधिकारी हैं और फिलहाल केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं।
जानिए क्या है संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के जरिए चयन की प्रक्रिया
स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए हाल ही में (26 मई को) नई दिल्ली में यूपीएससी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल और अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद की एक बेहद अहम बैठक हुई थी। चयन प्रक्रिया के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अधिकारियों की वरिष्ठता (सीनियरिटी), उनके फील्ड अनुभव और पिछले सेवा रिकॉर्ड (सर्विस रिकॉर्ड) को बारीकी से जांचकर 3 योग्य नामों का एक पैनल शॉर्टलिस्ट करता है। इसके बाद अंतिम फैसला राज्य सरकार और मुख्यमंत्री का होता है कि वह उस पैनल में से किसे राज्य का नया डीजीपी चुनती है, जिसके तहत राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगी।
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