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ED Conviction Rate : ED के 70वें स्थापना दिवस पर खुलासा, 94% कनविक्शन रेट और अरबों की संपत्ति जब्त।

ED Conviction Rate

ED Conviction Rate  : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपने 70वें स्थापना दिवस के अवसर पर अपनी अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों और भविष्य के रोडमैप का खाका पेश किया है। इस विशेष कार्यक्रम में ED के डायरेक्टर राहुल नवीन ने एजेंसी की कार्यप्रणाली में आए क्रांतिकारी बदलावों और देश की आर्थिक सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की। इस गरिमामयी अवसर पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव समेत कई दिग्गज अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने आर्थिक अपराधों के खिलाफ ED की जीरो टॉलरेंस नीति की सराहना की।

ED Conviction Rate  : बदलते दौर में अपराधों का नया स्वरूप: क्रिप्टोकरेंसी और साइबर चुनौतियां

डायरेक्टर राहुल नवीन ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक युग में आर्थिक अपराधों का चेहरा पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने बताया कि पहले जांच एजेंसियां मुख्य रूप से बैंक धोखाधड़ी और रियल एस्टेट घोटालों तक सीमित थीं। लेकिन आज, क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड, डार्क वेब के जरिए होने वाले साइबर अपराध, टेरर फंडिंग और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी गंभीर चुनौतियां सामने खड़ी हैं। ED ने इन डिजिटल खतरों से निपटने के लिए अपनी जांच प्रणाली को न केवल आधुनिक बनाया है, बल्कि तकनीकी रूप से भी सुदृढ़ किया है ताकि देश विरोधी गतिविधियों पर लगाम कसी जा सके।

ED Conviction Rate  : ऐतिहासिक कनविक्शन रेट: 94 प्रतिशत मामलों में मिल रही सफलता

एजेंसी की कार्यकुशलता का प्रमाण देते हुए डायरेक्टर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ED ने रिकॉर्ड स्तर पर काम किया है। इस अवधि में PMLA के तहत 812 चार्जशीट दाखिल की गईं, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुनी हैं। सबसे चौंकाने वाला और प्रभावी आंकड़ा एजेंसी का कनविक्शन रेट है, जो 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वर्तमान में ट्रायल कोर्ट में 2,400 से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें एजेंसी को भारी सफलता की उम्मीद है। यह दिखाता है कि मनी लॉन्ड्रिंग जैसे जटिल मामलों में भी ED की जांच बेहद सटीक और पुख्ता हो रही है।

अटैचमेंट में 170% का उछाल: पीड़ितों को लौटाई गई बड़ी धनराशि

ED का मुख्य उद्देश्य केवल सजा दिलाना ही नहीं, बल्कि अपराध से कमाई गई संपत्ति को कुर्क करना भी है। पिछले वित्त वर्ष में एजेंसी ने 81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की, जो पिछले साल के मुकाबले 170 प्रतिशत अधिक है। अब तक कुल 2.36 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि 2019 के कानून संशोधन के बाद, यह पैसा पीड़ितों को लौटाया जा रहा है। अब तक 63,142 करोड़ रुपये बैंकों, निवेशकों और घर खरीदारों को वापस दिए जा चुके हैं, जिसमें PACL जैसे बड़े मामलों के पीड़ित भी शामिल हैं।

भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर नकेल और अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व

भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून (FEOA) के तहत ED की कार्रवाई रंग ला रही है। 31 मार्च 2026 तक 54 लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें से 21 को आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का कद बढ़ा है; भारत अब एशिया-पैसिफिक एसेट रिकवरी नेटवर्क के स्टियरिंग ग्रुप की अध्यक्षता कर रहा है। साल 2026 में भारत इसकी वार्षिक बैठक की मेजबानी करेगा, जो वैश्विक स्तर पर आर्थिक अपराधों के खिलाफ भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सुरक्षित आर्थिक भविष्य: ED का अंतिम लक्ष्य और विजन

कार्यक्रम के समापन पर डायरेक्टर राहुल नवीन ने एजेंसी के विजन को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अपराधी भले ही नए-नए तरीके अपनाएं, लेकिन ED नई तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए हमेशा दो कदम आगे रहेगी। एजेंसी का प्राथमिक उद्देश्य देश की वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। उन्होंने अपने अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि अपराध की काली कमाई को वापस समाज के मुख्य प्रवाह में लाना और पीड़ितों को न्याय दिलाना ही ED की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

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