Mohan Bhagwat News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने देश को विदेशी बेड़ियों से आजाद कराने और हिंदू समाज के भीतर फैली फूट को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से संघ की स्थापना की थी। भागवत के अनुसार, हेडगेवार का यह दृढ़ विश्वास था कि भारतीय समाज में एकता और संगठन की कमी ही वह सबसे बड़ा कारण रही है, जिसकी वजह से हमें बार-बार बाहरी आक्रमणों और गुलामी का दंश झेलना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज आंतरिक रूप से सुदृढ़ नहीं होता, तब तक अखंड स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की रक्षा करना असंभव है।
Mohan Bhagwat News: स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए हेडगेवार का संघर्ष और वैचारिक यात्रा
तेलंगाना के निजामाबाद जिले के कंडाकुर्थी गांव में ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने हेडगेवार के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. हेडगेवार ने ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि राजनीतिक आंदोलन से लेकर सशस्त्र विरोध तक, हर संभव रास्ते पर कार्य किया था। अपनी इसी यात्रा के दौरान उन्हें यह बोध हुआ कि अंग्रेज भारत को गुलाम बनाने वाले पहले विदेशी नहीं थे। समस्या केवल बाहर से आने वाली ताकतें नहीं थीं, बल्कि हमारे अपने समाज के भीतर मौजूद वे कमियां थीं जिन्होंने उन ताकतों को फलने-फूलने का अवसर दिया।
Mohan Bhagwat News: हिंदुत्व की परिभाषा: सम्मान, सह-अस्तित्व और संस्कारों का संगम
संघ प्रमुख ने हिंदुत्व के मूल अर्थ को समझाते हुए कहा कि इसका तात्पर्य दूसरों के साथ मिलकर रहना, अपने सांस्कृतिक पथ पर अडिग रहना और बाकी सभी के विचारों व रास्तों का सम्मान करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ की प्रार्थना में भी इन्हीं गुणों का समावेश है। शाखाओं में आने वाले स्वयंसेवकों के भीतर यही संस्कार विकसित किए जाते हैं ताकि वे राष्ट्र के लिए समर्पित नागरिक बन सकें। हेडगेवार का दृष्टिकोण हिंदुओं को मजबूत, निडर और एक बेहतर इंसान बनाना था, ताकि भविष्य में कभी भी देश को दोबारा गुलामी के अंधेरे में न जाना पड़े।
मातृभूमि की रक्षा का संकल्प: किसी के विरोध में नहीं बना था संघ
मोहन भागवत ने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना किसी अन्य समुदाय या विचारधारा के खिलाफ नहीं की गई थी। संघ का मुख्य लक्ष्य किसी पर हमला करना नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि को पराधीनता से मुक्त कराना और उसे इतना शक्तिशाली बनाना था कि कोई भी बाहरी शत्रु उसकी ओर आंख उठाकर न देख सके। डॉ. हेडगेवार का मानना था कि यदि समाज अपनी बुनियादी कमजोरियों को दूर नहीं करता, तो आजादी के लिए किया गया संघर्ष केवल तात्कालिक होगा।
स्फूर्ति केंद्र से मिलेगी राष्ट्र निर्माण और निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा
कंडाकुर्थी गांव, जो डॉ. हेडगेवार का पैतृक स्थान है, वहां बना यह नया स्फूर्ति केंद्र आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्र सेवा का प्रकाश स्तंभ बनेगा। भागवत ने कहा कि आज देश के कोने-कोने में सक्रिय संघ के कार्यकर्ता उसी विजन पर काम कर रहे हैं जो कभी डॉ. हेडगेवार ने देखा था। यह केंद्र युवाओं को निस्वार्थ भाव से समाज और देश की मजबूती के लिए कार्य करने की प्रेरणा देगा। उन्होंने अंत में कहा कि समाज की आंतरिक शक्ति को जागृत करना ही वह स्थायी समाधान है जिससे भारत परम वैभव को प्राप्त कर सकता है।
