Headline
US Iran Peace Deal
US Iran Peace Deal : अमेरिका-ईरान शांति समझौते से वैश्विक मंच पर छाई खुशी, अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने किया स्वागत
Share Market Today
Share Market Today : शेयर बाजार में धमाका! सेंसेक्स 1100 अंक उछला, निफ्टी में जोरदार तेजी
FIFA World Cup 2026
FIFA World Cup 2026 : नीदरलैंड्स से ड्रा के बाद जापान कोच नाराज, उठाए सवाल
Noida International Airport
Noida International Airport : नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानें शुरू, जेवर हवाई अड्डे पर विमान की पहली लैंडिंग
US Iran Peace Deal
US Iran Peace Deal : 107 दिन बाद थमी अमेरिका-ईरान जंग, ट्रंप का बड़ा एलान, शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में समझौता
Colon Cancer
Colon Cancer : कोलन कैंसर के संकेत न करें नजरअंदाज! समय पर पहचान से बच सकती है जिंदगी
Devshayani Ekadashi
Devshayani Ekadashi : देवशयनी एकादशी 2026 से चातुर्मास शुरू, भगवान विष्णु शयन काल और धार्मिक महत्व जानें
PoK Protests News
PoK Protests News : PoK में फिर चलीं गोलियां, PAK सेना की फायरिंग में 2 प्रदर्शनकारियों की मौत
Iran America Peace Deal
Iran America Peace Deal : परमाणु हथियार नहीं बनाने पर राजी हुआ ईरान, तेल प्रतिबंधों से हटेगी बड़ी रोक

I-PAC Case: सुप्रीम कोर्ट में ममता सरकार की किरकिरी, I-PAC केस में ED के पावर पर SC ने दी बड़ी चेतावनी!

I-PAC Case

I-PAC Case:  पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य सरकार के बीच जारी टकराव अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए एक मौलिक प्रश्न खड़ा किया। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारी की पीठ ने ममता सरकार द्वारा ईडी की याचिका पर जताई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए पूछा, “क्या ईडी के अधिकारी मात्र इसलिए भारत के नागरिक नहीं रह जाते क्योंकि वे एक केंद्रीय एजेंसी का हिस्सा हैं?” अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच में बाधा डालना और अधिकारियों के अधिकारों का हनन करना संवैधानिक ढांचे के खिलाफ है।

I-PAC Case:  संवैधानिक नैतिकता पर सवाल: ‘अगर केंद्र में आपकी सरकार होती तो?’

सुनवाई के दौरान पीठ ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण काल्पनिक स्थिति पेश कर ममता सरकार को आईना दिखाया। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, “अगर केंद्र में आपकी पार्टी सत्ता में होती और कोई दूसरी राजनीतिक पार्टी राज्य स्तर पर केंद्रीय जांच में ऐसा ही हस्तक्षेप करती, तो क्या वह आपको स्वीकार्य होता?” यह टिप्पणी उस समय आई जब अदालत राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक (I-PAC) के कार्यालयों में छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री के कथित हस्तक्षेप के मामले की सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने संकेत दिया कि राज्य और केंद्र के बीच यह खींचतान संघीय ढांचे के लिए हानिकारक है।

I-PAC Case:  I-PAC रेड विवाद: ईडी बनाम पश्चिम बंगाल सरकार का नया मोर्चा

विवाद की जड़ें जनवरी की शुरुआत में हुई उस छापेमारी से जुड़ी हैं, जब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ काम करने वाली फर्म ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (I-PAC) के दफ्तरों पर दस्तक दी थी। ईडी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस तलाशी अभियान में जानबूझकर बाधा उत्पन्न की। एजेंसी का दावा है कि राज्य पुलिस का इस्तेमाल केंद्रीय अधिकारियों को डराने और जांच की दिशा मोड़ने के लिए किया गया, जो न्याय की प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप है।

राज्य पुलिस की भूमिका और जांच में बाधा पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

अदालत ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी (रखरखाव) पर सवाल उठाने वाली राज्य सरकार से पूछा कि क्या मुख्यमंत्री द्वारा ईडी के छापे में बाधा डालने की स्थिति में केंद्रीय एजेंसी को राज्य पुलिस के पास जाने का अधिकार नहीं है? अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति जांच एजेंसी के काम में कैसे अवरोध पैदा कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब राज्य मशीनरी ही जांच में रोड़ा बने, तो निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

SIR कार्यान्वयन पर सीजेआई की टिप्पणी: बंगाल में ही क्यों है समस्या?

इसी सत्र के दौरान पश्चिम बंगाल से जुड़े ‘सोशल इम्पैक्ट रिपोर्ट’ (SIR) के मामले में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी तीखी टिप्पणी की। सीजेआई ने कहा कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर देश के अन्य सभी राज्यों में SIR का कार्यान्वयन सुचारू रूप से चल रहा है और वहां इसे लेकर कोई विशेष मुकदमेबाजी नहीं हो रही है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि ‘तार्किक विसंगति’ जैसे तर्क केवल पश्चिम बंगाल में ही क्यों लागू किए जा रहे हैं। राज्य के वकीलों के तर्कों पर असहमति जताते हुए अदालत ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाए।

संघीय ढांचे और जांच की स्वायत्तता का संरक्षण

सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि न्यायपालिका जांच एजेंसियों की स्वायत्तता और उनके अधिकारियों के मानवाधिकारों को लेकर बेहद गंभीर है। आई-पैक मामले में ममता सरकार की आपत्तियों ने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है कि राज्य और केंद्र की शक्तियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज्य सरकार अपने रुख में बदलाव करती है या यह कानूनी लड़ाई और लंबी खिंचती है।

Read More: Middle East war 2026: पीएम मोदी और ट्रंप की फोन पर गुप्त मंत्रणा, ऊर्जा सुरक्षा और शांति पर बड़ा फैसला!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
नींद बार-बार टूटना क्यों होता है? WhatsApp Web बना और स्मार्ट राजस्थान में आज भी राबड़ी है पहली पसंद गर्मी में Hot Coffee से मिलती है ठंडक? स्किन ऑयली है?