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Shivam Dube Train Journey: टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद शिवम दुबे का अनोखा सफर, फ्लाइट छोड़ पकड़ी ट्रेन, 3rd AC में किया सफर!

Shivam Dube Train Journey

Shivam Dube Train Journey: न्यूजीलैंड को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हराकर टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम करने के बाद जहां पूरी भारतीय टीम जीत के जश्न में डूबी थी, वहीं ऑलराउंडर शिवम दुबे ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। विश्व विजेता बनने के चंद घंटों बाद, जब टीम के अन्य सदस्य चार्टर्ड फ्लाइट और भव्य स्वागत की तैयारी कर रहे थे, दुबे ने मुंबई स्थित अपने घर पहुंचने के लिए रेलगाड़ी का रास्ता चुना। सोशल मीडिया पर उनके इस साधारण सफर की तस्वीरें और खबरें तेजी से वायरल हुईं, जिसके बाद खुद धाकड़ क्रिकेटर ने इस साहसिक और भावुक फैसले के पीछे की असली वजह का खुलासा किया है।

परिवार से मिलने की बेताबी: क्यों चुनी हवाई जहाज के बजाय ट्रेन?

विश्व कप की जीत के बाद खिलाड़ियों के लिए सुरक्षा और प्रोटोकॉल बेहद सख्त होते हैं, लेकिन शिवम दुबे के मन में कुछ और ही चल रहा था। उन्होंने बताया कि खिताबी जीत की खुशी के बीच उन्हें अपने पिता और छोटे बच्चे की बहुत याद आ रही थी। महीनों के कड़े अभ्यास और विदेशी दौरों के बाद वे अपने परिवार से मिलने के लिए एक पल का भी इंतजार नहीं करना चाहते थे। चूंकि अहमदाबाद से मुंबई के लिए तत्काल कोई उपयुक्त फ्लाइट उपलब्ध नहीं थी और अगली फ्लाइट में काफी समय था, इसलिए दुबे ने समय बर्बाद करने के बजाय ट्रेन से सफर करने का बड़ा निर्णय लिया।

3-टियर एसी कोच और सुबह 5 बजे का सफर: एक चैंपियन की सादगी

आमतौर पर स्टार क्रिकेटर्स लग्जरी और प्राइवेसी को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन शिवम दुबे ने अपनी पत्नी और एक करीबी दोस्त के साथ 3-टियर एसी कोच में टिकट बुक की। उन्होंने सुबह करीब 5 बजे की ट्रेन पकड़ी ताकि वे जल्द से जल्द मुंबई पहुंच सकें। दुबे ने बताया कि उनके पास सड़क मार्ग से जाने का भी विकल्प था, लेकिन ट्रैफिक और दूरी को देखते हुए उन्हें ट्रेन सबसे तेज और सटीक माध्यम लगी। एक विश्व विजेता खिलाड़ी का आम जनता के बीच इस तरह सफर करना उनकी सादगी और परिवार के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

पहचान छिपाने की चुनौती: कैप, मास्क और ‘सीक्रेट’ प्लानिंग

विश्व कप जीतने के तुरंत बाद सार्वजनिक स्थान पर जाना किसी जोखिम से कम नहीं था। दुबे के परिवार और दोस्तों को डर था कि अगर स्टेशन या कोच में प्रशंसकों ने उन्हें पहचान लिया, तो भारी भीड़ जमा हो सकती है जिससे सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ सकती है। इस चुनौती से निपटने के लिए दुबे ने एक ‘सीक्रेट’ मास्टरप्लान तैयार किया। उन्होंने खुद को पूरी तरह कवर करने के लिए कैप, फेस मास्क और फुल स्लीव के कपड़े पहने। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि वे ट्रेन छूटने के मात्र 5 मिनट पहले तक कार में ही रहेंगे और जैसे ही सिग्नल होगा, सीधे अपनी सीट पर जाकर बैठ जाएंगे।

सफलतापूर्वक घर वापसी: जब जुनून के आगे फीकी पड़ी चुनौतियां

दुबे की यह प्लानिंग काम कर गई और वे बिना किसी बड़ी परेशानी के मुंबई पहुंचने में सफल रहे। उन्होंने साझा किया कि स्टेशन पर सन्नाटा होने के कारण वे आसानी से कोच तक पहुंच गए। हालांकि कुछ सह-यात्रियों को संदेह हुआ, लेकिन मास्क और सादे कपड़ों की वजह से उनकी पहचान गुप्त बनी रही। घर पहुंचते ही जब उन्होंने अपने बच्चे को गोद में लिया और पिता के गले लगे, तो उन्हें महसूस हुआ कि ट्रेन का वह थका देने वाला सफर इस पल के सामने कुछ भी नहीं था।

खेल भावना और पारिवारिक मूल्यों का अनूठा संगम

शिवम दुबे का यह कदम यह साबित करता है कि मैदान पर बड़े-बड़े छक्के लगाने वाला यह खिलाड़ी जमीन से कितना जुड़ा हुआ है। एक तरफ जहां खिलाड़ियों के लिए ‘स्टारडम’ सबसे ऊपर होता है, वहीं दुबे ने दिखाया कि एक पिता और बेटे की जिम्मेदारी उनके लिए किसी भी सेलिब्रेशन से बड़ी है। उनकी यह ‘ट्रेन यात्रा’ न केवल उनकी सादगी की मिसाल बनी, बल्कि भविष्य के खिलाड़ियों के लिए यह संदेश भी दे गई कि जड़ों से जुड़े रहना ही असली महानता है।

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