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Laddu Mar Holi : कब है बरसाना की प्रसिद्ध ‘लड्डू मार होली’? तिथि, पौराणिक कथा और इस उत्सव का धार्मिक महत्व

Laddu Mar Holi

Laddu Mar Holi : सनातन परंपरा में फाल्गुन मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है, जिसे पूरे देश में होली के रूप में मनाया जाता है। लेकिन जब बात कान्हा की नगरी ब्रज की आती है, तो यहाँ का नज़ारा पूरी तरह अलग और अलौकिक होता है। ब्रज में होली का उल्लास बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाता है, जो पूरे 40 दिनों तक चलता है। यहाँ लड्डू मार होली, लट्ठमार होली और फूलों वाली होली जैसे विभिन्न रंग देखने को मिलते हैं। आइए जानते हैं साल 2026 में कब खेली जाएगी लड्डू मार होली और क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा।

Laddu Mar Holi : ब्रज में कब मनाई जाएगी लड्डू मार होली 2026?

ब्रज मंडल में उत्सवों की श्रृंखला बहुत लंबी है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार, इस वर्ष लड्डू मार होली 24 फरवरी 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी। इसी दिन नंदगांव से फाग आमंत्रण की परंपरा भी निभाई जाएगी। यह उत्सव मुख्य रूप से बरसाना के श्रीजी मंदिर (राधा रानी मंदिर) में आयोजित किया जाता है। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए न केवल भारत के विभिन्न राज्यों से, बल्कि विदेशों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक बरसाना पहुँचते हैं।

Laddu Mar Holi : लड्डू मार होली के पीछे की रोचक पौराणिक कथा

वृंदावन के विशेषज्ञों और पुजारियों के अनुसार, लड्डू मार होली की परंपरा द्वापर युग से जुड़ी हुई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता राधा के पिता वृषभानु जी ने नंदगांव में नंद बाबा के घर होली खेलने का निमंत्रण भेजा था। जब नंद बाबा ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया, तो उन्होंने अपने पुरोहित (पंडा) के माध्यम से स्वीकृति का संदेश वापस बरसाना भेजा।

जब पुरोहित बरसाना पहुँचे, तो वहां उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्हें खाने के लिए थाल भरकर लड्डू दिए गए। इसी बीच गोपियों ने पुरोहित को गुलाल लगाना शुरू कर दिया। पुरोहित के पास उस समय अपना बचाव करने के लिए रंग नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपने हाथ में मौजूद लड्डुओं को ही गोपियों पर फेंकना शुरू कर दिया। लड्डुओं की इस मीठी “बारिश” ने एक उत्सव का रूप ले लिया, जिसे आज भी ‘लड्डू मार होली’ के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।

कैसे मनाया जाता है यह भव्य उत्सव?

लड्डू मार होली के दिन बरसाना का श्रीजी मंदिर भक्ति के सागर में डूबा रहता है। मंदिर के ऊंचे प्रांगण से पुजारी और पंडे नीचे उपस्थित भक्तों की भीड़ पर कई क्विंटल लड्डू बरसाते हैं। भक्त इन लड्डुओं को प्रसाद के रूप में पाने के लिए लालायित रहते हैं। मान्यता है कि जिस पर यह लड्डू गिरता है, वह अत्यंत सौभाग्यशाली होता है और उसे राधा-कृष्ण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। हवा में उड़ते हुए पीले लड्डू और भक्तों का “राधे-राधे” का उद्घोष पूरे वातावरण को दिव्य बना देता है।

लड्डू मार होली से जुड़ी 5 प्रमुख और खास बातें

ब्रज की इस होली को समझने के लिए इन पांच बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है:

  1. लट्ठमार होली का आगाज: लड्डू मार होली हमेशा विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली से ठीक एक दिन पहले मनाई जाती है। यह एक तरह से मुख्य होली उत्सव की पूर्व संध्या होती है।

  2. निमंत्रण की परंपरा: इस दिन आधिकारिक रूप से यह तय होता है कि नंदगांव के हुरियारे अगले दिन बरसाना आकर होली खेलेंगे।

  3. प्रसाद का वितरण: इस उत्सव में इस्तेमाल होने वाले लड्डू केवल खाने की वस्तु नहीं, बल्कि “राधा रानी का प्रसाद” माने जाते हैं, जिसे पाने के लिए भक्तों में भारी उत्साह रहता है।

  4. हजारों किलो लड्डू: मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर कई सौ किलो से लेकर कुंतलों तक लड्डुओं का इंतजाम करते हैं ताकि कोई भी भक्त खाली हाथ न जाए।

  5. सांस्कृतिक धरोहर: यह केवल एक खेल नहीं है, बल्कि ब्रज की प्राचीन अतिथि सत्कार परंपरा और भक्ति भाव का जीता-जागता उदाहरण है।

ब्रज यात्रा की तैयारी

यदि आप 2026 में इस उत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो 24 फरवरी को बरसाना पहुँचने की योजना बनाएं। लड्डू मार होली के अगले दिन यानी 25 फरवरी को बरसाना की लट्ठमार होली होगी और फिर अगले दिन नंदगांव में इसी प्रकार का आयोजन होगा। ब्रज की गलियां इन दिनों अबीर, गुलाल और भगवान के प्रेम में डूबी रहती हैं।

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