Corruption Index 2025: ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (TI) द्वारा जारी नवीनतम ‘भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक’ (CPI) 2025 की रिपोर्ट ने बांग्लादेश के शासन तंत्र की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश का स्कोर 100 में से मात्र 24 अंक रह गया है, जो देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की भयावहता को दर्शाता है। यह स्कोर न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि देश में राजनीतिक अस्थिरता ने भ्रष्टाचार को पनपने के लिए उपजाऊ जमीन दी है। हालिया जन आंदोलनों के बाद जनता को जिस सुधार की उम्मीद थी, वह अब धूमिल होती नजर आ रही है।
Corruption Index 2025: वैश्विक और क्षेत्रीय रैंकिंग: दक्षिण एशिया में पिछड़ता बांग्लादेश
वैश्विक स्तर पर बांग्लादेश की साख में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कुल 182 देशों की सूची में बांग्लादेश अब नीचे से 13वें पायदान पर पहुँच गया है। साल 2024 की तुलना में यह रैंकिंग एक पायदान और नीचे खिसक गई है। दक्षिण एशियाई देशों की तुलना करें, तो बांग्लादेश की स्थिति केवल युद्धग्रस्त अफगानिस्तान से बेहतर है। भूटान, भारत और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में बांग्लादेश का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक है, जो इसके निवेश और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
Corruption Index 2025: अंतरिम सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल: ‘लूटतंत्र’ पर लगाम लगाने में विफल
जुलाई के ऐतिहासिक आंदोलन के बाद गठित अंतरिम सरकार से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन रिपोर्ट इसे एक बड़ी विफलता करार देती है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार शासन में ईमानदारी और पारदर्शिता का कोई नया मानक स्थापित नहीं कर पाई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार के पास भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए कोई स्पष्ट रणनीतिक एजेंडा या ‘रिस्क मैनेजमेंट प्लान’ (जोखिम प्रबंधन योजना) नहीं है। जो जनता ‘डिक्लेप्टिफिकेशन’ (लूटतंत्र की समाप्ति) का सपना देख रही थी, उसे अब प्रशासनिक ढुलमुलपन और जवाबदेही की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
संस्थागत सुधारों का दम घोंटती नौकरशाही
भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (ACC) जैसी संस्थाएं आज भी शक्तिहीन बनी हुई हैं। आयोग की स्वतंत्रता और उसकी प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि सरकार द्वारा शुरू किए गए सुधारों को नौकरशाही के भीतर से ही कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ के वादे के विपरीत, सरकार ‘चयनात्मक दृष्टिकोण’ अपना रही है, जहाँ केवल चुनिंदा मामलों में ही कार्रवाई की जा रही है, जबकि व्यवस्थागत भ्रष्टाचार पर कोई ठोस वार नहीं हुआ है।
डिजिटल सुधारों की दौड़ में नेपाल और यूक्रेन से पिछड़ा ढाका
रिपोर्ट में बांग्लादेश की तुलना नेपाल, वियतनाम और यूक्रेन जैसे देशों से की गई है। ये वे देश हैं जो कभी बांग्लादेश के बराबर या उससे पीछे थे, लेकिन उन्होंने डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देकर और कड़े प्रशासनिक सुधारों के जरिए अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। यूक्रेन जैसा देश, जो युद्ध की विभीषिका झेल रहा है, वह भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखा रहा है। वहीं, बांग्लादेश प्रशासनिक अक्षमता और इच्छाशक्ति की कमी के कारण इस दौड़ में काफी पीछे छूट गया है।
‘वसूली वाली मानसिकता’ और नागरिक समाज पर प्रहार
प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में ‘अब हमारी बारी’ जैसी खतरनाक वसूली वाली मानसिकता (Extortionist Mindset) ने भ्रष्टाचार को जड़ों तक धंसा दिया है। स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सरकारी मशीनरी में अवैध वसूली और रिश्वतखोरी की प्रवृत्ति पहले से अधिक मजबूत हुई है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले मीडिया संस्थानों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं पर बढ़ते हमलों ने निगरानी तंत्र को कमजोर कर दिया है। जब तक सवाल उठाने वाली आवाजों को दबाया जाएगा, तब तक भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह लड़ाई सफल नहीं हो पाएगी।
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