India Economy: संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भारत की बढ़ती वैश्विक साख और आर्थिक प्रगति की जमकर सराहना की है। ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के आयोजन से पहले न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में गुतारेस ने कहा कि भारत वर्तमान में एक ‘बेहद सफल’ उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक मामलों में भारत का प्रभाव जिस तरह बढ़ा है, उसे देखते हुए यह देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। गुतारेस ने भारत सरकार को इस ऐतिहासिक पहल के लिए बधाई देते हुए इसे समय की मांग बताया है।
India Economy : एआई पर दो महाशक्तियों के एकाधिकार के खिलाफ गुतारेस की चेतावनी
महासचिव गुतारेस ने एआई तकनीक के संतुलित विकास पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह तकनीक पूरी मानवता के लिए एक साझा साधन होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि एआई का लाभ केवल विकसित देशों या किन्हीं दो महाशक्तियों (अमेरिका और चीन) तक सीमित नहीं रहना चाहिए। गुतारेस के अनुसार, यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि ऐसी शक्तिशाली तकनीक केवल कुछ खास देशों का विशेषाधिकार बनकर रह जाए। उन्होंने कहा कि एआई की अपार संभावनाओं का लाभ दुनिया के हर व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए, ताकि यह तकनीक समावेशी विकास का माध्यम बन सके।
India Economy : 16 से 20 फरवरी: ‘ग्लोबल साउथ’ का पहला बड़ा एआई सम्मेलन
भारत द्वारा आयोजित ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का आयोजन 16 से 20 फरवरी तक होने जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन इस मायने में ऐतिहासिक है क्योंकि यह ‘ग्लोबल साउथ’ (एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देश) के किसी देश में आयोजित होने वाला अपनी तरह का पहला वैश्विक कार्यक्रम है। यह सम्मेलन ‘लोग, धरती और प्रगति’ (People, Planet, and Progress) के तीन आधारभूत सिद्धांतों पर केंद्रित है। महासचिव गुतारेस स्वयं इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत की यात्रा करेंगे, जो इस कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय गंभीरता को दर्शाता है।
वैश्विक मामलों में भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका
गुतारेस ने भारत के बढ़ते कद का विश्लेषण करते हुए कहा कि भारत आज न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में भी इसकी भूमिका अपरिहार्य हो गई है। उन्होंने माना कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की आवाज को मंच प्रदान करने के लिए भारत का नेतृत्व अत्यंत आवश्यक है। एआई के लाभों में विकासशील देशों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए भारत एक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है, जो भविष्य की तकनीक को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
तकनीकी जोखिमों और संभावनाओं पर होगी गहन चर्चा
शिखर सम्मेलन के एजेंडे पर चर्चा करते हुए महासचिव ने कहा कि यहाँ एआई से जुड़ी संभावनाओं के साथ-साथ इसके संभावित जोखिमों पर भी विस्तार से मंथन किया जाएगा। एआई के कारण पैदा होने वाली नैतिक चुनौतियों, सुरक्षा संबंधी खतरों और नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे विषयों पर भारत में होने वाली यह चर्चा वैश्विक नीति निर्धारण में दिशा देने का काम करेगी। गुतारेस ने उम्मीद जताई कि यह समिट एक ऐसा वैश्विक ढांचा तैयार करने में मदद करेगी जहाँ तकनीक का उपयोग केवल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण और समानता के लिए हो।


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