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6 महीने के बच्चे को नमक देना चाहिए या नहीं? पूरी जानकारी

6 महीने के बच्चे को नमक देना चाहिए या नहीं? पूरी जानकारी

विशेषज्ञों और WHO की सलाह के अनुसार, 6 महीने के बच्चों के भोजन में अतिरिक्त नमक नहीं डालना चाहिए। इस उम्र में शिशु का गुर्दा (किडनी) पूरी तरह से विकसित नहीं होता, जिससे शरीर में सोडियम को फिल्टर करना मुश्किल हो सकता है। माँ के दूध और शुरुआत के ठोस आहार में पहले से ही थोड़ी प्राकृतिक मात्रा में सोडियम मौजूद होता है, जो बच्चे की जरूरत को पूरा कर देता है। इसलिए इस उम्र में स्वाद बढ़ाने के लिए नमक देने की बजाय, बच्चे को प्राकृतिक स्वाद के साथ खाने की आदत डालनी चाहिए। इससे भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की बीमारियों का खतरा भी कम होता है।

6 महीने के बच्चों को नमक खाने से क्या होता है?

6 महीने के बच्चों के लिए नमक ज्‍यादा नुकसानदायक हो सकता है। उनके शरीर की फिल्टरिंग क्षमता कम होती है, जिससे अतिरिक्त नमक का सीधा असर किडनी पर पड़ सकता है। इससे डिहाइड्रेशन, उल्टी, सुस्ती, चिड़चिड़ापन या गंभीर मामलों में दौरे भी आ सकते हैं। लंबे समय तक ज्‍यादा नमक देने से बच्चा बड़े होकर हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी बीमारियों का शिकार भी हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि एक साल की उम्र तक बच्चे के खाने में अलग से नमक बिल्कुल न डालें, ताकि शरीर पर अनावश्यक दबाव न पड़े और किडनी को सुरक्षित रखा जा सके।

बच्चे को नमक कब देना चाहिए?

ज्यादातर डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक साल की उम्र के बाद बच्चे के आहार में हल्की मात्रा में नमक शामिल किया जा सकता है। लेकिन तब भी रोजाना की मात्रा बहुत कम-लगभग 1 ग्राम सोडियम या उससे भी कम रखनी चाहिए। नमक देने की शुरुआत भी धीरे-धीरे करनी चाहिए, ताकि बच्चे को ज्यादा नमकीन स्वाद की आदत न पड़े। बच्चे के स्वाद विकास के लिए प्राकृतिक मसाले या हर्ब्स जैसे धनिया, जीरा पाउडर या हल्दी का हल्का उपयोग किया जा सकता है, जिससे स्वाद भी बढ़े और सेहत को नुकसान भी न हो।

बच्चों के लिए स्वाद क्यों जरूरी है?

बच्चे का स्वाद बचपन से ही विकसित होता है। अगर शुरुआत से ही उसे नमक और चीनी जैसे तेज स्वाद मिलेंगे, तो बच्चा वही पसंद करने लगेगा और प्राकृतिक स्वादों से दूर हो जाएगा। इससे भविष्य में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ता है। इसलिए बेहतर है कि शुरूआती आहार में बच्चे को उबली हुई सब्ज‍ियों, दाल या अनाज का हल्का स्वाद चखने दें। बच्चे की जीभ धीरे-धीरे हर तरह के स्वाद के लिए संवेदनशील बनेगी, और उसे प्राकृतिक स्वाद ज्‍यादा पसंद आएगा।

बिना नमक के भी बच्चे को कैसे दें स्वादिष्ट खाना?

बहुत से माता-पिता सोचते हैं कि बिना नमक का खाना बच्चे को बेस्वाद लगेगा। लेकिन हकीकत यह है कि 6 महीने का बच्चा पहली बार ठोस खाना चख रहा होता है, इसलिए उसके लिए उबली सब्जि‍यों का हल्का स्वाद भी नया और अच्छा लगता है। आप भोजन में मसालेदार हर्ब्स का हल्का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे जीरा पाउडर, हल्दी या हींग। ये प्राकृतिक मसाले न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि पाचन में भी मदद करते हैं। इस तरह बच्चे को सेहतमंद और स्वादिष्ट खाना देना आसान हो जाता है।

बच्चों में ज्‍यादा नमक खाने की आदत से क्या खतरे हैं?

छोटे बच्चों को ज्‍यादा नमक की आदत पड़ जाए तो आगे चलकर उन्हें हर चीज में तेज नमक चाहिए होता है। यह आदत आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और किडनी की बीमारियों का बड़ा कारण बन सकती है। साथ ही, यह खाने की प्राकृतिक पसंद को भी प्रभावित करती है और बच्चा सब्जि‍यों या फल जैसी चीजें खाना कम कर देता है। इसलिए, बेहतर है कि शुरू से ही बच्चे को हल्के और प्राकृतिक स्वाद की आदत डालें, ताकि वह संतुलित और हेल्दी डाइट लेना सीखे।

क्या प्राकृतिक नमक (हिमालयन या सेंधा) बच्चों के लिए ठीक है?

अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि प्रोसेस्ड नमक की जगह अगर सेंधा नमक, हिमालयन पिंक सॉल्ट या सी सॉल्ट दें तो वह सुरक्षित रहेगा। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि छोटे बच्चों की किडनी के लिए कोई भी नमक-चाहे वह प्राकृतिक हो या प्रोसेस्ड-अतिरिक्त बोझ ही डालता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इन नमकों में कुछ मिनरल्स ज्यादा होते हैं, लेकिन सोडियम की मात्रा लगभग उतनी ही रहती है। इसलिए एक साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार का नमक नहीं देना चाहिए। बच्चे की सेहत के लिए बेहतर है कि स्वाद के लिए हर्ब्स, हल्दी, जीरा आदि का हल्का इस्तेमाल करें और नमक से पूरी तरह परहेज रखें।

क्या पैक्ड बेबी फूड में भी नमक होता है?

जी हां, कई रेडीमेड बेबी फूड, सूप, स्नैक्स या सीरियल्स में स्वाद बढ़ाने के लिए छुपा हुआ नमक और शुगर मिलाया जाता है। पैकेट पर “No added salt” लिखा हो, तब भी कुछ प्राकृतिक सोडियम हो सकता है, लेकिन यह बच्चे की जरूरत के मुताबिक सीमित मात्रा में होता है। इसलिए सबसे अच्छा तरीका है घर पर बना ताजा खाना देना, जिसमें आपको पता हो कि क्या डाला गया है। अगर पैकेट वाला बेबी फूड लेना ही पड़े, तो उसके लेबल को ध्यान से पढ़ें और सोडियम की मात्रा कम से कम हो, वही चुनें। बच्चों की आदतें बचपन में बनती हैं, इसलिए शुरुआत से ही हेल्दी चॉइस सबसे जरूरी है।

क्या नमक की जगह कुछ और विकल्प हैं?

छोटे बच्चों के खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए कई हेल्दी और प्राकृतिक विकल्प हैं-जैसे हल्का जीरा पाउडर, धनिया पत्ती, हींग, हल्दी, दालचीनी या लौंग का बहुत हल्का पानी में उबला स्वाद। इससे बच्चे का खाना खुशबूदार और स्वादिष्ट बनता है, पाचन भी बेहतर होता है और किडनी पर नमक का बोझ भी नहीं पड़ता। साथ ही, बच्चे को अलग-अलग प्राकृतिक स्वादों से परिचित कराना भी जरूरी है ताकि आगे जाकर वह केवल नमक-शुगर पर निर्भर न रहे। स्वाद के ये स्वस्थ विकल्प धीरे-धीरे बच्चे की फूड हैबिट्स को संतुलित और पौष्टिक बनाने में मदद करते हैं।

माता-पिता के लिए कुछ जरूरी टिप्स

  • कभी भी बच्चे के खाने में नमक या चीनी डालने की जल्दबाजी न करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना स्पेशल बेबी फूड या नमकीन स्नैक्स न दें।
  • अगर घर में बाकी सभी लोग नमक खा रहे हैं, तब भी बच्चे के लिए अलग से बिना नमक का खाना बनाएं।
  • धीरे-धीरे स्वाद विकसित होने दें-यह बच्चे के लिए लंबे समय तक फायदेमंद होगा।
  • बच्चे की बढ़ती उम्र और सेहत के हिसाब से डॉक्टर से चर्चा करते रहें।

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