गांधीजी की कहानी 8 पड़ावों में, कैसे बने सत्य और अहिंसा के प्रतीक
पोरबंदर से शुरुआत: 1869 में गा
ंधीजी का जन्म हुआ।
सच्चाई का संस्कार: बचपन में सत्
य को जीवन का मूल मंत्र बनाया।
दक्षिण अफ्रीका का मोड़: भेदभाव
की घटना ने उन्हें संघर्ष के लिए प्रेरित किया।
अहिंसा की शक्ति: बिना हिंसा के अन
्याय के खिलाफ आवाज उठाई।
स्वदेशी की राह: चरखे और खादी को आत्मनिर्
भरता का प्रतीक बनाया।
नमक से आंदोलन: दांडी मार्च ने अंग्रेजी श
ासन को बड़ी चुनौती दी।
आजादी की पुकार: ‘करो या मरो’ से स्वतंत
्रता आंदोलन को नई ऊर्जा मिली।
विचारों की विरासत: गांधीजी के सत्य औ
र अहिंसा के संदेश आज भी याद किए जाते हैं।