हाथ की कढ़ाई पहचानने के लिए ध्यान रखें ये बातें

हैंडमेड कढ़ाई में हल्की असमानता होती है, हर टांका बिल्कुल एक जैसा नहीं दिखता।

मशीनमेड कढ़ाई में टांके बराबर और सटीक होते हैं, पैटर्न बहुत साफ और एक जैसा लगता है।

कपड़े को पलटकर जरूर देखें, पीछे का हिस्सा असली पहचान बता सकता है।

हाथ की कढ़ाई के पीछे धागों की गांठें या उलझन दिख सकती है, जबकि मशीनमेड पीछे से भी साफ होती है।

हैंडमेड कढ़ाई में टेक्सचर और उभार ज्यादा महसूस होता है, खासकर जरदोजी, चिकनकारी और फुलकारी में।

मशीन से बनी कढ़ाई अक्सर सपाट दिखती है, उसमें हाथ की कारीगरी जैसी जीवंतता कम होती है।

बारीक और भारी हैंडमेड कढ़ाई बनाने में काफी समय लगता है, कई दिन या हफ्ते भी लग सकते हैं।

अगर बहुत भारी कढ़ाई कम समय में तैयार होने का दावा हो, तो उसके मशीनमेड होने की संभावना ज्यादा हो सकती है।