दही हांडी की परंपरा का कृष्ण से क्या रिश्ता?
कृष्ण जन्माष्टमी के बाद दही हांडी की रौनक दि
खती है।
इस उत्सव की जड़ें कान्हा की नटखट बाल
लीलाओं में हैं।
बचपन में श्रीकृष्ण को माखन-दही खा
ना खूब भाता था।
गोपियां मटकी को ऊंचाई पर रख
कर माखन बचाती थीं।
कान्हा दोस्तों संग मिलकर मटकी तक पहुंचन
े की तरकीब निकालते थे।
आज दही हांडी में गोविंदा मानव पिरामिड बनाकर
मटकी तोड़ते हैं।
मटकी फूटते ही उत्सव में खुशी और उल्लास छा
जाता है।
महाराष्ट्र में यह पर्व सबसे भव्य तरीके से मनाया जाता है।